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गाने बजाने के लिए करना होगा भुगतान, बॉम्बे हाईकोर्ट का नया फरमान

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गाने बजाने के लिए करना होगा भुगतान, बॉम्बे हाईकोर्ट का नया फरमान

New Year Party के लिए आपने तैयारियां शुरु कर दी होगी. अपना मनपसंद रेस्टोरेंट या बार चुन लिया होगा और झूमने के लिए कुछ गाने भी सोच लिए होंगे. लेकिन न्यू ईयर पार्टी हो और उसमें भी पुलिस या कोर्ट से कुछ फरमान ना आ जाए, ऐसा कैसे हो सकता है. तो इस बार नया पंगा बॉम्बे हाईकोर्ट की तरफ से आया है. कोर्ट ने अपने नए आदेश में कहा है कि देश भर के रेस्तरां, पब व होटल, कैफे, बार व रिसॉर्ट के लिए पीपीएल (फोनोग्राफिक परफॉर्मेंस लिमिटेड) को भुगतान किए बिना कॉपीराइट वाले गाने नहीं बजाए जा सकते. अगर गाने के लिए भुगतान नहीं किए बिना गाने बजे तो कार्रवाई हो सकती है. इस नए कोर्ट ऑर्डर को सीधे तरीके से समझें तो ज्यादातर लोकप्रिय और हिट गाने पीपीएल इंडिया के कॉपीराइट के दायरे में ही आते हैं. जैसे हम जानते ही हैं कि भारत में म्यूजिक कंपनी टी-सीरीज, सोनी म्यूजिक या यूनिवर्सल म्यूजिक ही बनाते हैं. पीपीएल इंडिया सारेगामा, सुपर कैसेट्स (टी सीरीज), सोनी म्यूजिक, यूनिवर्सल म्यूजिक समेत और कई अन्य विशालतम रिकॉर्ड लेबलों का प्रतिनिधित्व करती है, जिन्होंने असाइनमेंट और / या एक्सक्लूसिव लाइसेंस अग्रीमेंट के आधार पर पीपीएल को अधिकार दिए हैं कि वह कॉपीराइट अधिनियम, 1957 की प्रासंगिक धाराओं के तहत सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए लाइसेंस शुल्क एकत्रित कर सकती है. यह आदेश संगीत लाइसेंस देने वाली संस्था फोनोग्राफिक परफॉरमेंस लिमिटेड (पीपीएल) द्वारा दायर एक याचिका के जवाब में पारित किया गया था, जिसके तहत संगीत बजाने वाले उक्त स्थलों को एक लाइसेंस शुल्क का भुगतान करना पड़ेगा. इस आदेश का कोई भी उल्लंघन ऐसे प्रतिष्ठानों के खिलाफ अवमानना माना जाएगा और इस पर कानूनी कार्यवाई हो सकती है.

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