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UP पुलिस ने मदरसा छात्रों पर लगाए थे संगीन आरोप, अब क्यूँ किया रिहा?

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UP पुलिस ने मदरसा छात्रों पर लगाए थे संगीन आरोप, अब क्यूँ किया रिहा?

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में 20 दिसंबर को नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन हुआ था. इस प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने हौज-ए-इल्मिया इमाम हुसैन मदरसा के कई छात्रों को हिरासत में लिया था और कुछ पर गंभीर आपराधिक धाराएं लगाई गई थीं. अब यूपी पुलिस ने मदरसा के इन छात्रों से 17 आपराधिक धाराओं में से 16 धाराओं को हटा दिया है. बता दें कि 10 छात्रों को रिहा कर दिया गया है. मदरसा के वकील नसीम जैदी के मुताबिक, पुलिस ने सबूत न होने का हवाला देते हुए 4 नाबालिग छात्रों को 3 जनवरी को ही छोड़ दिया था. जैदी बताते हैं कि पुलिस ने आईपीसी के सेक्शन 188 को छोड़कर बाकी सभी धाराओं को मदरसा के सभी 10 छात्रों पर से हटा लिया है. आईपीसी की धारा 188 तब लगाई जाती है जब धारा 144 का उल्लंघन होता है. मदरसे से जुड़े दूसरे वकील कामरान हसनैन कहते हैं कि एफआईआर पूरी तरह से झूठ पर आधारित थी. रिपोर्ट के मुताबिक, मुजफ्फरनगर एसएसपी अभिषेक यादव का कहना है कि सभी धाराएं "सबूतों के अभाव" के कारण हटाई गई हैं. लेकिन एसएसपी ये नहीं बताते कि जब कोई सबूत था ही नहीं, तो आखिर किस आधार पर ऐसी गंभीर धाराएं लगाई गई थीं. वकील नसीम जैदी ने कहा कि पुलिस ने "गलतफहमी" में छात्रों को गिरफ्तार कर लिया था. उन्होंने कहा, ‘प्रदर्शन के दौरान, कुछ बाहरी मदरसे के आसपास भी थे, और पुलिस ने इसी गफलत में छात्रों को हिरासत में ले लिया. अब आरोपों के खिलाफ सबूत दिए जाने पर धाराएं हटाई गईं.’

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