content-cover-image

मजबूर की गुहार, ‘हमें देश से जाने दो या करने दो आत्महत्या’

मुख्य खबरें

00:00

ट्रेंडिंग रेडियो

मजबूर की गुहार, ‘हमें देश से जाने दो या करने दो आत्महत्या’

जहां एक तरफ नागरिकता कानून को लेकर देशभर में विरोध चल रहा है, वहीं इसी बीच ऊना में दलित उत्पीड़न के शिकार एक शख्स ने राष्ट्रपति को चिट्ठी लिखकर दूसरे देश भेज देने की गुहार लगाई है. पीड़ित वासराम सरवैया ने चिट्ठी में लिखा है कि उन्हें और उनके भाई को ऐसे देश भेज दें, जहां उन्हें जातिय भेदभाव का सामना ना करना पड़े. दरअसल, 11 जुलाई, 2016 को गुजरात के गिर सोमनाथ जिले के ऊना में कथित गौरक्षकों ने वशराम, रमेश समेत 4 लोगों की पिटाई की थी. साथ ही आधी रात को कपड़े उतारकर सड़कों पर घुमाया गया था. हमलावरों ने इनपर गौहत्या का आरोप लगाया था. इस हमले का वीडियो वायरल हुआ या था, जिसके बाद दलितों में काफी नाराजगी थी और उन्होंने पूरे राज्य में प्रदर्शन भी किया था. वशराम सरवैया, ने कहा कि वो नागरिकता संशोधन कानून का विरोध करते हैं लेकिन अगर अधिनियम लागू होता है , तो उनको ऐसे देश भेज देना चाहिए जहां दलितों को समान नागरिक माना जाए और भेदभाव का सामना नहीं करना पड़े. वशराम बताते हैं कि 2016 में जिन लोगों ने उन्हें पीटा उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है. अपराधी जमानत पर बाहर हैं. बता दें कि इस परिवार ने इससे पहले राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पत्र लिखकर इच्छामृत्यु की मांग की थी. वशराम ने कहा है कि अगर इस बार उनकी याचिका पर विचार नहीं किया गया, तो वह और उनके भाई नई दिल्ली में राष्ट्रपति भवन के बाहर आत्मदाह कर लेंगे.

Show more
content-cover-image
मजबूर की गुहार, ‘हमें देश से जाने दो या करने दो आत्महत्या’मुख्य खबरें