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लाखों में हुई थी डील, DSP को 2 आतंकियों को करना था आज़ाद

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लाखों में हुई थी डील, DSP को 2 आतंकियों को करना था आज़ाद

शनिवार की सुबह श्रीनगर से एक आई-10 कार तेजी से जम्मू की ओर फर्राटा भर रही थी. यह कार मामूली नहीं थी. जम्मू-कश्मीर के खुफिया ब्यूरो के आला अधिकारी इस कार की मूवमेंट पर नजर रखे हुए थे. इस कार में तीन ऐसे टारगेट सवार थे जिनकी इंटेलिजेंस एजेंसियों को बड़ी शिद्दत से तलाश थी. कार तेजी से जम्मू की ओर बढ़ रही थी. तभी दक्षिण कश्मीर के कुलगाम में जम्मू-कश्मीर पुलिस का नाका आया और कार में बैठी सवारियों की धड़कनें बढ़ गईं. इस कार का पीछा कर रहे थे जम्मू-कश्मीर पुलिस के डीआईजी अतुल गोयल. जम्मू-कश्मीर पुलिस का ये ऑफिसर NIA में कई सालों तक ट्रेनिंग ले चुका था और अब जम्मू-कश्मीर कैडर में वापस आ चुका था. कुलगाम नाका पर थोड़ा सा एक्शन हुआ और डीएसपी देवेंद्र सिंह हिज्बुल मुजाहिद्दीन के दो खूंखार आतंकियों के साथ गिरफ्तार कर लिया गया. 57 साल के देवेंद्र सिंह कई हफ्तों से पुलिस के रडार पर थे. शोपियां के एसपी संदीप चौधरी देवेंद्र सिंह से जुड़े संदिग्ध कॉल को रिकॉर्ड करने वाले पहले अधिकारी थे. दरअसल, DSP अब नवीद बाबू और रफी को जम्मू भागने में मदद कर रहा था. खुफिया सूत्रों ने बताया, "असली मकसद नवीद बाबू और उसके सहयोगी को कश्मीर से बाहर ले जाना और फिर पाकिस्तान भागने में मदद करना था." सूत्र ये भी बताते हैं कि आतंकियों को भागने में मदद करने के लिए देवेंद्र सिंह को 12 लाख रुपये दिए गये थे. देवेंद्र सिंह की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने श्रीनगर के इंदिरा नगर स्थित उसके घर की तलाशी ली तो यहां हथियारों का जखीरा मिला. पुलिस ने यहां से 5 ग्रेनेड, 3 एके-47 राइफल बरामद किए हैं. सूत्र बताते हैं कि इस बात की आशंका है कि देवेंद्र सिंह ने पहले भी आतंकियों की मदद की है. अब पुलिस अधिकारी एयरपोर्ट पर सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रहे हैं.

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