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Kejriwal की जीत में भी अपनी जीत क्यों देख रहा RSS?

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Kejriwal की जीत में भी अपनी जीत क्यों देख रहा RSS?

दिल्ली विधानसभा चुनाव में अरविंद केजरीवाल की जीत में भी RSS को अपने एजेंडे की जीत दिख रही है. संघ इस बात से खुश है कि केजरीवाल ने कम से कम देश को यह संदेश तो दिया कि वह नेता हैं, लेकिन साथ में हिंदू भी हैं. बात 20 मार्च, 2019 की है. जब अरविंद केजरीवाल एक तस्वीर ट्वीट कर विवादों में घिर गए थे. तस्वीर में हिंदुओं के प्रतीक चिह्न् स्वास्तिक के पीछे एक व्यक्ति झाड़ू ताने हुए दिखता है. इस विवादित ट्वीट के बाद न केवल केजरीवाल की शिकायत हुई थी, बल्कि उन्हें भारी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था. बीजेपी को भी उन पर धर्म विशेष के तुष्टीकरण के आरोपों को और मजबूती से चिपकाने का मौका मिला था. यही अरविंद केजरीवाल दिल्ली विधानसभा चुनाव में बदले-बदले नजर आए. चुनाव में उन्हीं हिंदू प्रतीकों को भुनाते नजर आए, जिनके अपमान पर कभी घिरे थे. चुनाव के दौरान सॉफ्ट हिंदुत्व की पिच पर बैटिंग कर हनुमान भक्त बन गए. मतदान से पहले कनॉट प्लेस हनुमान मंदिर जाकर दर्शन-पूजन किए तो जीत के बाद भी माथा टेकने पहुंचे. केजरीवाल ने जीत का श्रेय भी हनुमान जी को देते हुए कहा था, "आज मंगलवार है और हनुमान जी का दिन है. हनुमान जी ने दिल्ली पर कृपा बरसाई है. केजरीवाल की राजनीतिक शैली में महज 11 महीने के भीतर आए इस बदलाव को संघ अपनी जीत मानता है. दिल्ली विधानसभा चुनाव में केजरीवाल की जीत में भी आरएसएस को अपने एजेंडे की जीत दिख रही है. RSS के एक वरिष्ठ प्रचारक ने कहा कि चुनाव के दौरान मंदिर जाकर केजरीवाल ने जाने-अनजाने में ही सही, कम से कम देश को यह संदेश दे ही दिया कि वह नेता हैं, लेकिन साथ में हिंदू भी और मैं हिंदू पहचान के साथ जीने में शर्म नहीं, सम्मान समझते हैं." संघ के प्रचारक बोले कि , “हिंदू संस्कृति को मानने वाले हर व्यक्ति को हम अपना मानते हैं. चाहे वह कांग्रेस का हो या फिर आम आदमी पार्टी का. हम बेशक बीजेपी को हिंदूहितों के साथ खड़ी पार्टी मानते हैं, मगर इसका मतलब यह नहीं कि बीजेपी ही हिंदुत्व की ठेकेदार है. केजरीवाल की राजनीति अच्छी हो या बुरी मगर उन्होंने हनुमान मंदिर जाकर हिंदू प्रतीकों और संस्कृति का सम्मान किया है.”

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