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जज के तबादले में क्यों की गई जल्दबाज़ी...क्या घबराई हुई है मोदी सरकार?

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जज के तबादले में क्यों की गई जल्दबाज़ी...क्या घबराई हुई है मोदी सरकार?

मोदी सरकार फिलहाल बुरी तरह से घिरी हुयी है , कोई कह रहा है कि 'ऐसा लगाता है न्याय करने वालों को देश में बख्शा नहीं जाएगा', तो कोई जस्टिस एस मुरलीधर का तबादला मामले में सरकार पर सवाल उठाते हुए बोल रहा कि 'पूरा देश अचंभित है, लेकिन मोदी शाह सरकार की दुर्भावना, कुत्सित सोच व निरंकुशता किसी से छिपी नहीं, जिसके चलते वो उन लोगों को बचाने का हर संभव प्रयास करेंगे, जिन्होंने भड़काऊ भाषण दे नफरत के बीज बोए और हिंसा फैलाई'. दरअसल, पिछले कुछ दिनों में देश की राजधानी में हुई हिंसा को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में बुधवार को अहम सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस को फटकार लगाने वाले जस्टिस एस मुरलीधर का तबादला दिल्ली हाईकोर्ट से पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में कर दिया गया है. राष्ट्रपति भवन से जस्टिस एस मुरलीधर के तबादले की अधिसूचना भी जारी कर दी गई है. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भारत के मुख्य न्यायाधीश शरद अरविंद बोबड़े के साथ परामर्श करने के बाद ये फैसला लिया है. इसके साथ ही उन्हें अपने कार्यालय का प्रभार संभालने के निर्देश भी दिये गए हैं. वैसे तो जानकारी के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 12 फरवरी को हुई अपनी बैठक में दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस एस मुरलीधर को पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में स्थानांतरित करने की सिफारिश की थी. लेकिन इसके पीछे की पूरी सच्चाई भी आम जनता को नहीं पता। दिल्ली हिंसा मामले में सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा था कि दिल्ली में दूसरे '1984' को नहीं होने देंगे. इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को फटकार लगाया था और कोर्ट में बीजेपी नेताओं का वीडियो देखा गया था. जस्टिस मुरलीधर के फैसले और कार्रवाई कई लोंगो के आँखों की किसकिरी बनती साफ़ देखी जा सकती थी . इस मामले में अब सरकार पर विपक्ष ये सवाल उठा रहा हैं कि - 1. क्या उन्हें यह डर था कि यदि पार्टी के नेताओं की स्वतंत्र व निष्पक्ष जांच की जाएगी, तो दिल्ली की हिंसा, आतंक व अफरा-तफरी में आपकी खुद की मिलीभगत का पर्दाफाश हो जाएगा? 2. निष्पक्ष व प्रभावशाली न्याय सुनिश्चित किए जाने से रोकने के लिए आप कितने जजों का ट्रांसफर करेंगे? 3. क्या आपके पास अपनी ही पार्टी के नेताओं द्वारा दिए गए विषैले बयानों को उचित ठहराने का कोई रास्ता नहीं था, इसलिए आपने उस जज का ही ट्रांसफर कर दिया, जिसने पुलिस को आपकी पार्टी के नेताओं की जांच करने का आदेश दिया था? आम जनता की तरफ से भी सवाल जायज़ है.. कि बीते दिन कोर्ट में हुई तीखी सुनवाई और दिल्ली हिंसा मामले में जस्टिस मुरलीधर के कड़े शब्दों के चंद घंटों बाद ही उनके तबादले का प्रस्ताव क्यों आया? इसे संयोग कहा जाए या सोच-समझ कर लिया गया कदम, या सरकार की कोई उलटफेर की कोशिश? आपका क्या सोचना है?

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