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Leap Year 2020: इतनी मज़ेदार बातें नहीं जानीं, तो क्‍या जाना !!

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Leap Year 2020: इतनी मज़ेदार बातें नहीं जानीं, तो क्‍या जाना !!

दोस्तों , आज है 29 February, 2020 . तारीख आपको इसलिए बता रहे हैं क्यूंकि ये कहने का मौका चार साल में एक बार ही आता है. इसीलिए आज के स्पेशल दिन पर हम आपको बताएँगे Leap Year से जुड़ी कुछ मज़ेदार बातें , जो आपने पहले नहीं सुनी होंगी। साथ ही हमारे श्रोताओं के लिए हम लेकर आएं हैं एक ख़ास और अनोखा मौका , जिसे जानने के लिए इस ऑडियो को अंत तक सुनें। तो बात करते हैं दुनिया भर में सबसे ज्‍यादा इस्‍तेमाल होने वाले Gregorian calendar की, जिसके मुताबिक हर 4 साल में 1 अतिरिक्‍त दिन जोड़ा जाता है। यह दिन फरवरी में जुड़ता है, जिससे ये महीना 28 दिन की बजाय 29 दिन का हो जाता है। इस जोड़े गए अतिरिक्‍त दिन को Leap Day और इस साल को Leap Year कहा जाता है। क्या आपको मालूम है कि 29 फरवरी को पैदा होने वाले लोगों को लीपिंग या लीपर कहते हैं। और दिलचस्प बात ये है कि कई लोग लीप डे को अशुभ मानते हैं, लेकिन ज्योतिषों के मुताबिक 29 फरवरी को पैदा होने वाले बच्चे पराक्रमी होते हैं। ज्योतिष कहते हैं कि इस दिन जन्में बच्चे विलक्षण प्रतिभा वाले होते हैं। ये लोग पराक्रम की दृष्टि से अद्भुत होते हैं। ये तो आप जानते ही हैं कि साल 2020 भी एक लीप ईयर है, यानि इसकी फरवरी 29 दिनों की है और आज वही extra दिन है । लेकिन दिलचस्प बात तो ये है कि लीप यीयर के दिन कर्मचारियों को एक दिन अधिक मुफ़्त में काम करना पड़ता है क्योंकि सैलरी के सबंध में इस दिन की गणना नहीं की जाती है । यानी आप आज फ्री में काम कर रहे हैं (laughingly). ऐसे साल में 365+1 यानि 366 दिन होते हैं। लेकिन एक समय था जब लोग एक साल में 355 दिन मानते थे और हर 2 सालों के बाद 22 दिनों का एक अतिरिक्त महीना कैलेंडर में जोड़ा जाता था। अब आसान शब्‍दों में लीप ईयर की थोड़ी गणित जानें तो जिस साल को 4 से भाग देने पर शेष जीरो आता हो, वो लीप ईयर होगा, लेकिन सिर्फ वही शताब्‍दी वर्ष लीप ईयर होगा, जो 400 के अंक से पूरी तरह विभाजित हो जाए। इस हिसाब से साल 2000 लीप ईयर था, लेकिन 1900 लीप ईयर नहीं था। क्या आपने सोचा है कि आखिर क्‍यों जरूरी है लीप ईयर? दरअसल, सरल शब्‍दों में समझें तो कह सकते हैं कि हमारे कैलेंडर और धरती की भौगोलिक ऋतुएं एक दूसरे के साथ तालमेल में बनी रहें, इसके लिए ही कैलेंडर में लीप ईयर जरूरी है। लीप ईयर न होने पर कुछ सदियों के अंतराल में मौसम और कैलेंडर के महीने आगे पीछे हो जाएंगे। हो सकता है कि जून महीने में पूरी दुनिया में भीषण सर्दी पड़ रही हो। है न रोचक ?

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