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Fake News Buster: क्या मुसलमानों को दंगा करने के लिए दिए गए थे पैसे?

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Fake News Buster: क्या मुसलमानों को दंगा करने के लिए दिए गए थे पैसे?

नागरिकता कानून को लेकर दिल्ली में भड़की हिंसा के बीच, कई अनवेरिफाइड मैसेज और वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किए गए. ऐसा ही एक वीडियो फिर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. इस वीडियो में लाइन में खड़ी महिलाएं पैसे लेते देखी जा रही हैं. इस वीडियो को सोशल मीडिया पर इस दावे के साथ काफी शेयर किया जा रहा है कि ये घटना शाहीन बाग की है, जहां पिछले दो महीने से नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन चल रहा है. हालांकि, ये पाया गया कि ये वीडियो न शाहीन बाग का है, और न ही महिलाओं को प्रदर्शन के लिए पैसे दिए जा रहे हैं. मेघालय के राज्यपाल तथागत रॉय ने भी इसी दावे के साथ ये वीडियो शेयर किया. फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर भी ये वीडियो शेयर हुआ. जांच करने के बाद, हमने पाया कि ये वीडियो नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली के पुराने मुस्तफाबाद का है. शिव विहार में हिंसा के बाद इस इलाके में आईं महिलाओं को राहत सामग्री दी जा रही है. तो पैसे की बात कहां से आई? इन दावों की एक-एक कर जांच की गई- वीडियो पुराना मुस्तफाबाद की गली नंबर 9 है, जैसा की वीडियो में दावा किया गया था. हमें कई समानताएं मिलीं, जिससे ये साफ होता है कि ये वीडियो पुराना मुस्तफाबाद का है, न कि शाहीन बाग का. बता दें कि पुराना मुस्तफाबाद के स्थानीय कारोबारी शाहजाद मलिक से भी बात की गयी, जिन्हें वायरल वीडियो में पैसे बांटते देखा जा सकता है. जब उनसे वीडियो को लेकर सवाल किया गया, तो मलिक ने बताया कि उन्होंने शिव विहार से आई उन महिलाओं को पैसे दिए, जिनके घर दिल्ली में हुई हिंसा में या तो जला दिए गए, या जिनपर हमला हुआ. मलिक उस घर के बाहर रहता है जहां राहत सामग्री खत्म होने के बाद वीडियो शूट किया गया था और उसने पैसे बांटे थे. इससे पहले भी दिल्ली हिंसा को लेकर कई फेक न्यूज शेयर की गई. किसी भी खबर पर यकीन करने के पहले और फैलाने से पहले एक बार अपनी समझ का इस्तेमाल ज़रूर करें।

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