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ISRO ने ख़ास प्रोजेक्ट के लिए जितना पैसा मांगा, सरकार ने उसका आधा भी नहीं दिया!

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ISRO ने ख़ास प्रोजेक्ट के लिए जितना पैसा मांगा, सरकार ने उसका आधा भी नहीं दिया!

गगनयान. भारत का पहला अंतरिक्ष मानव मिशन. मतलब वो प्रोजेक्ट, जिसे ‘महत्वाकांक्षी’ की कैटेगरी में रखते हैं. इसके बावजूद बहुत ‘महत्व’ नहीं दिया जा रहा है. गगनयान के लिए इंडियन स्पेस एंड रिसर्च ऑर्गनाइजेशन ने इस बार के बजट (2020-21) में जितना पैसा मांगा था, उसका सिर्फ 30 फीसदी ही फंड मिला है. ISRO का लक्ष्य 2022 तक अंतरिक्षयात्रियों और क्रू मेंबर्स को स्पेस में भेजना है. रिपोर्ट के मुताबिक, 2020-21 वर्ष के लिए ISRO ने इस मिशन पर 4,257 करोड़ रुपए के खर्च का आकलन किया था, लेकिन 1200 करोड़ रुपए ही मिले. डिपार्टमेंट से जुड़ी साइंस एंड टेक्नोलॉजी, पर्यावरण,वन और जलवायु परिवर्तन पर संसदीय समिति ने शुक्रवार, 6 मार्च को रिपोर्ट पेश की. इसमें कहा गया कि, गगनयान प्रोजेक्ट काफी प्रतिष्ठित राष्ट्रीय प्रयास है, जिसकी ग्लोबल वैल्यू है. लेकिन 2020-2 1 के लिए बजट एलोकेशन इसके महत्व को नहीं दिखाता है.’ समिति ने सिफारिश की है कि गगनयान प्रोग्राम के तहत बजट का आवंटन 3000 करोड़ रुपए तक बढ़ाया जाए, जैसा कि स्पेस डिपार्टमेंट ने कहा था. दिसंबर 2018 में कैबिनेट की तरफ से क्लियर किए बजट के मुताबिक, गगनयान की कुल लागत 10,000 करोड़ रुपए है. ISRO ने पहले ही ग्राउंड टेस्ट किया है. चार अंतरिक्षयात्रियों की रूस में स्पेस फ्लाइट ट्रेनिंग हुई है. कई राष्ट्रीय संस्थाओं की मदद से मेडिकल किट, हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम, इमरजेंसी सरवाइवल किट, फायर सप्रेशन सिस्टम जैसी चीजें बनाई जा रही हैं. इसके अलावा फ्रेंच स्पेस एजेंसी CNES की मदद से तीन हफ्ते की फ्लाइट सर्जन ट्रेनिंग हुई है. ISRO ने क्रू इस्केप सिस्टम के लिए नए साधन का प्रयोग किया है. ISRO ने 2020 के अंत तक दो मानवरहित फ्लाइट का प्लान बनाया है. 15 अगस्त, 2018 को पीएम मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर प्रोजेक्ट गगनयान को लॉन्च करने का ऐलान किया था. मिशन के तहत भारत के तीन लोग सात दिनों तक अंतरिक्ष में रहेंगे. मिशन में रूस और फ्रांस भारत की सहायता कर रहे हैं. भारत इस उपलब्धि को हासिल करने वाला दुनिया का चौथा देश होगा. हादसा होने की स्थिति में अंतरिक्ष यात्री कैप्सूल में बैठकर पृथ्वी की कक्षा में सुरक्षित पहुंच सकेंगे. इसे ISRO ने ही बनाया है. ISRO मानव क्रू मॉड्यूल और पर्यावरण नियंत्रण के साथ ही जान बचाने की टेक्नोलॉजी विकसित कर चुका है. 2022 में गगनयान को भेजने के अलावा ISRO जियोसिंक्रोनस सेटेलाइट लांच व्हीकल मार्क-III (GSLV Mark-III) का इस्तेमाल करते हुए दो और मानवरहित मिशन भेजेगा.

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