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दिल्ली हिंसा को लेकर लोकसभा में बोले Shah, तो Cong ने किया वॉकआउट

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दिल्ली हिंसा को लेकर लोकसभा में बोले Shah, तो Cong ने किया वॉकआउट

लोकसभा में बुद्धवार को दिल्ली हिंसा पर हुई चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, 'दिल्ली हिंसा में जान गंवाने वालों को मैं श्रद्धांजलि देता हूं. 25 फरवरी रात 11 बजे के बाद दिल्ली में हिंसा नहीं हुई. भावनाओं को ध्यान में रखते हुए होली के बाद सदन में इस मुद्दे पर चर्चा की गई. दिल्ली में दंगा प्रभावित इलाकों 20 लाख की आबादी थी. 12 थाना क्षेत्रों में हिंसा फैली. 4 प्रतिशत इलाकों में हिंसा को रोका गया' गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्‍ली हिंसा पर लोकसभा में चर्चा का जवाब देते हुए कहा, 'इसे राजनीतिक रंग देने की कोशिश की गई. जिनकी जान गई उनके लिए दुख व्यक्त करता हूं श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं.' काफी सारे सदस्यों ने एक सवाल उठाया कि दिल्ली पुलिस क्या कर रही थी? इस सदन के अंदर विपक्ष का ये दायित्व है कि सत्ता पक्ष और उसके अधीन विभागों की कड़ी आलोचना करे और उनकी निगरानी रखे और कहीं गलती होती है तो उसे सदन में भी और बाहर भी उठाये। दिल्ली पुलिस के सर पर सबसे पहली जिम्मेदारी हिंसा को रोकना थी. 24 फरवरी, 2020 को 2 बजे के आस-पास पहली सूचना प्राप्त हुई थी और अंतिम सूचना 25 फरवरी को रात 11 बजे प्राप्त हुई. दिल्ली पुलिस ने 36 घंटे में दंगे को समाप्त करने का काम किया है। आप मुझ पर सवाल उठा सकते हैं और आपको ये अधिकार है, लेकिन तथ्यों के साथ तोड़-फोड़ करने का किसी का अधिकार नहीं है. उन्होंने कहा कि मैं श्रीमान ट्रम्प के कार्यक्रम में बैठा था, उनका कार्यक्रम पहले से तय था और मेरे संसदीय क्षेत्र में था। इन्हीं सब के बीच जब कांग्रेस ने गृहमंत्री के भाषण पर वॉक आउट किया तो शाह बोले जवाब अभी खत्म नहीं हुआ है। इसके बाद उन्होंने कहा कुछ लोगों ने कहा कि CRPF, मिलिट्री भेजनी चाहिए थी. 23 तारीख को 17 कंपनी दिल्ली पुलिस की, 13 कंपनी CRPF की कुल 30 कंपनी क्षेत्र में पहले से ही रखी थी. 27 फरवरी से आज तक 700 से ज्यादा FIR हमने दर्ज की हैं. 2,647 लोग हिरासत में लिए गए हैं. CCTV फुटेज 25 से ज्यादा कम्प्यूटर पर एनालिसिस हो रहा है. शाह ने कहा की हमने लोगों से, मीडिया से दंगों का फुटेज मांगा है और मुझे कहते हुए आनंद है कि दिल्ली की जनता ने हजारों की तादात में पुलिस को वीडियो भेजे हैं. मुझे आशा है कि अंकित शर्मा के खून का भेद भी वो ही वीडियो में से बाहर आने वाला है. हमने पूरे लोकतान्त्रिक तरीके से चर्चा करके संसद के दोनों सदनों ने CAA को मतदान करके पास किया था. फिर भी इसे लेकर देशभर में लोगों को गुमराह किया गया कि इससे अल्पसंख्यकों की नागरिकता चली जाएगी. मुझे बताइये की इसमें कौन सा क्‍लॉज है जिससे किसी की नागरिकता जाती हो.

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