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दिल्ली हिंसा पर संसद में Sonia का नाम लिए बगैर साधा गया निशाना

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दिल्ली हिंसा पर संसद में Sonia का नाम लिए बगैर साधा गया निशाना

फरवरी में हुई हिंसा पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बुधवार 11 मार्च को संसद में विपक्ष के सवालों के जवाब दिए. अमित शाह ने कहा कि इस हिंसा को राजनीतिक रंग देने का प्रयास किया गया. शाह ने कहा कि 25 फरवरी की रात के बाद दिल्ली में हिंसा की एक भी घटना नहीं हुई. होली पर माहौल शांतिपूर्ण बना रहे, इसलिए होली के बाद सदन में चर्चा की बात कही थी. शाह ने कहा कि दिल्ली में हुए दंगों को देश और दुनिया के सामने अलग रंग देने का प्रयास किया जा रहा है. दिल्ली पुलिस पर सवाल उठ रहे हैं. विपक्ष पूछ रहा है कि पुलिस क्या कर रही थी. शाह बोले कि मैं बताना चाहूंगा कि पुलिस मुस्तैदी से अपना काम कर रही थी. 20 लाख लोगों की आबादी के बीच हो रहे दंगों को बाकी दिल्ली तक न फैलने देना दिल्ली पुलिस की कामयाबी रही. इस हादसे को दिल्ली की 13 प्रतिशत आबादी तक सीमित रखने का काम दिल्ली पुलिस ने किया. गृह मंत्री अमित शाह के जवाब के दौरान विपक्ष के सांसदों ने लोकसभा में हंगामा किया. कांग्रेस ने वॉक आउट कर दिया. हालांकि गृहमंत्री अमित शाह ने फिर से बोलना शुरू किया. कहा कि मैं दिल्ली हिंसा पर बात करते हुए इसकी पृष्ठभूमि में जानना चाहूंगा. इस हिंसा के पीछे दिल्ली में चल रहे सीएए विरोधी प्रदर्शनों की भी भूमिका रही है. अमित शाह ने कहा, 14 फरवरी को सीएए के खिलाफ रामलीला मैदान में एक पार्टी की बड़ी रैली की गई. पार्टी की अध्यक्ष ने अपने भाषण में कहा- घर से बाहर निकलो. यह आर-पार की लड़ाई का वक्त है. इसके बाद 16 दिसंबर को शाहीन बाग का धरना शुरू हो गया. एक स्पीच होती है 17 फरवरी को. 24 फरवरी को ट्रंप जब भारत आएंगे तो हम बताएंगे कि भारत की सरकार क्या कर रही है. इसके बाद हिंसा की शुरुआत होती है. वारिस पठान 19 फरवरी को कहते हैं कि जो चीज मांगने से नहीं मिलती उसे छीननी पड़ती है. इसके बाद 24 फरवरी को दंगे होते हैं. शाह ने कहा कि देश में दंगों के दौरान मारे गए लोगों में से 76 प्रतिशत लोग कांग्रेस के शासन के दौरान मारे गए. आपको कोई हक नहीं है कि आप दंगों पर इस तरह की बात करें.

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