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Coronavirus : Mask-Sanitizer की मनमानी कीमत वसूलने पर सरकार ने उठाया सख्त कदम

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Coronavirus : Mask-Sanitizer की मनमानी कीमत वसूलने पर सरकार ने उठाया सख्त कदम

देश में कोरोना वायरस का फैलाव हो रहा है. ऐसे समय मास्क और सैनिटाइजर की मांग बढ़ गई है जबकि बाजार में इनकी अनुपलब्धता, कालाबाजारी और मनमानी कीमतें वसूले जाने की शिकायत मिल रही हैं. केंद्र सरकार ने मास्क , सैनिटाइजर और ग्लब्स को लेकर डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट लगाया है. कालाबाजारी और ज़्यादा कीमतों पर बिकने को लेकर यह पहल की गई है. नेशनल फार्मास्यूटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी से कहा गया है कि उपलब्धता और कीमत पर नज़र रखें. सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश ध्यान रखें कि जो एमआरपी पैक पर हो उससे ज़्यादा कीमत न वसूली जाए. राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों को निर्देश दिए गए हैं कि उत्पादन और उपलब्धता को लेकर खास ध्यान रखें कि जमाखोरी और कालाबाज़ारी न हो पाए. आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत अब मास्क और हैंड सैनेटाइजर भी आएंगे. विगत कुछ सप्ताहों के दौरान कोविड-19 (Coronavirus) के मौजूदा प्रकोप और कोविड-19 प्रबंधन के लिए लॉजिस्टिक संबंधी चिंताओं के परिप्रेक्ष्य में सरकार ने कदम उठाए हैं. मास्क (2 प्लाई एवं 3 प्लाई सर्जिकल मास्क, एन95 मास्क) और हैंड सैनिटाइजर या तो बाजार में अधिकांश विक्रेताओं के पास उपलब्ध नहीं है अथवा बहुत अधिक कीमतों पर काफी मुश्किल से उपलब्ध हो रहे हैं। सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की अनुसूची में संशोधन करते हुए इन वस्तुओं को 30 जून 2020 तक आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत आवश्यक वस्तु के रूप में घोषित करने के लिए एक आदेश जारी किया है. सरकार ने विधिक माप विज्ञान अधिनियम के तहत एक एडवाइजरी भी जारी की है. आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत राज्य, विनिर्माताओं के साथ विचार-विमर्श करके उनसे इन वस्तुओं की उत्पादन क्षमता बढ़ाने, आपूर्ति श्रृंखला को सुचारू बनाने के लिए कह सकते हैं. जबकि विधिक माप विज्ञान अधिनियम के तहत राज्य इन दोनों वस्तुओं के अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी.) पर बिक्री सुनिश्चित कर सकते हैं.

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