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फांसी रोकने के लिए जेल में आत्महत्या कर चुके राम सिंह का सहारा ले रहे हैं निर्भया के दोषी

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फांसी रोकने के लिए जेल में आत्महत्या कर चुके राम सिंह का सहारा ले रहे हैं निर्भया के दोषी

20 मार्च की सुबह 5:30 बजे. निर्भया गैंगरेप के चार दोषियों को फांसी होनी है. पर ये फांसी किस तरह से रोकी जाए, इसके लिए जी तोड़ पैंतरे अपनाए जा रहे हैं. चौथी बार डेथ वारंट जारी होने के बाद और दया और पुनर्विचार याचिका खारिज होने के बाद दोषी पहले इंटरनैशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस यानी ICJ गए और अब राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC) का दरवाज़ा इन्होंने खटखटाया है. दोषियों का केस लड़ रहे वकील एपी सिंह ने बताया कि उन्होंने NHRC में फांसी रोकने की अपील की है. साथ ही दोषी राम सिंह के परिवार को मुआवजा देने की भी मांग की है. राम सिंह के परिवार में उसकी 70 साल की मां और उसका 10 साल का बेटा है. वकील एपी सिंह का कहना है कि राम सिंह ने जेल में फांसी नहीं लगाई थी, बल्कि उसकी हत्या की गई थी. वकील ने कहा कि इस बात का एकमात्र गवाह मुकेश सिंह है, इसीलिए उसे जल्दी फांसी नहीं होनी चाहिए. नहीं तो ये मानव अधिकार के खिलाफ होगा. एपी सिंह का कहना है कि ‘ब्लैक वारंट’ किताब से बात साफ हो गई थी. इस किताब में साफ था राम सिंह को मारा गया था, और जेल के अधिकारी इसमें शामिल थे. मामले की जांच पक्षपातपूर्ण होने के बाद भी राम सिंह के परिवार को कोई आर्थिक मदद नहीं दी गई. एपी सिंह का कहना है कि इस पूरे मामले का गवाह मुकेश सिंह है. और अगर उसे मार दिया गया, तो ये गलत होगा. अब वकील के इस तर्क से अगर मुकेश सिंह की फांसी रुकती है तो बाकी के तीन दोषियों की फांसी भी रोकनी पड़ेगी. क्योंकि कानून के मुताबिक, एक ही अपराध के दोषियों को एक ही साथ फांसी दी जाती है.

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