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SC ने टेलीकॉम कंपनियों को फटकार लगाई- जनता का पैसा नहीं दबा सकते

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SC ने टेलीकॉम कंपनियों को फटकार लगाई- जनता का पैसा नहीं दबा सकते

दूरसंचार कंपनियों को बकाया एडजेस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी फटकार लगाई है. जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस एमआर शाह की बेंच ने साफ कर दिया कि कंपनियों को बकाया पैसा देना ही होगा. यह जनता का पैसा है. कोर्ट ने साथ ही कंपनियों के खुद से AGR का आकलन करने पर भी तीखी टिप्पणी की. जस्टिस मिश्रा ने कहा- ‘बकाया पैसा जनता का है. इसे पिछले 20 साल से नहीं चुकाया गया है.’ कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि कंपनियों को 24 अक्टूबर, 2019 के फैसले के तहत ही भुगतान करना होगा. इसमें कोर्ट ने ब्याज और जुर्माने सहित पूरी रकम जमा करने का आदेश दिया था. बता दें कि टेलीकॉम कंपनियों पर एजीआर का करीब 92 हजार करोड़ रुपया बकाया था. इसमें कुछ रकम कंपनियों ने पिछले दिनों सरकार को जमा कराई थी. सुनवाई के दौरान वोडाफोन के वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि बकाया रकम की गणना में कुछ खामियां हैं. इस पर जस्टिस मिश्रा ने कहा कि खामी हजारों करोड़ो रुपये की नहीं हो सकती. कंपनियों ने कमाई की है, उन्हें 2002 से अब तक की रकम चुकानी होगी. आपको बता दें कि पूरा मामला क्या है, एयरटेल समेत देश की तमाम टेलीकॉम कंपनियों पर करीब 1.47 लाख करोड़ रुपये का AGR बकाया है. एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू संचार मंत्रालय के दूरसंचार विभाग द्वारा टेलीकॉम कंपनियों से लिया जाने वाला यूजेज और लाइसेंसिग फीस है. इसके दो हिस्से होते हैं- स्पेक्ट्रम यूजेज चार्ज और लाइसेंसिंग फीस, जो क्रमश 3-5 फीसदी और 8 फीसदी होता है.

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