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Special: निर्भया के वो 6 ख़त और उसकी आख़िरी ख़्वाहिश

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Special: निर्भया के वो 6 ख़त और उसकी आख़िरी ख़्वाहिश

सुनिए निर्भया के वो 6 खत और उसकी आखिरी ख्वाहिश साल 2012 में हुए जिस गैंगरेप ने न केवल दिल्ली, बल्कि देश और दुनियाभर को हिलाकर रख दिया। उसके गुनाहगारों को आज निर्धारित समय पर सुबह 5:30 बजे फांसी की सजा दी गई। हैवानों की हैवानियत से आखिरी तक लड़ने वाली निर्भया तो हमारे बीच नहीं रही, लेकिन आज हम आपको निर्भया से जुड़ी बेहद अहम बात बताने जा रहे हैं, जिसके बारे में शायद पहले आपने नहीं सुना होगा। दिल्ली के एम्स अस्पताल में पीड़ा और सहन न होने वाला दर्द झेल रही निर्भया बोल नहीं पा रही थी। अपनी बात अपनी मां तक पहुंचाने के लिए वो हिम्मत जुटाकर उन्हें लिखकर समझा रही थी। आइए आपको बताते हैं निर्भया के उन 6 खतों के बारे में जो उनसे अस्पताल में दर्द और पीड़ा के बीच अपनी मां को लिखा और अपनी आखिरी ख्वाहिश के बारे में उन्हें बताया। सुनिए निर्भया की 6 चिट्ठियां... (1) 16 दिसबंर को गैंगरेप के बाद उसे एम्स में भर्ती कराया गया। खून से लथपथ निर्भया असीम पीड़ा में थी। 19 दिसंबर 2012 को उसने अपनी मां को पहली चिट्ठी लिखी। उसने लिखा कि मां मुझे बहुत दर्द हो रहा है। ये दर्द मुझसे सहा तक नहीं जा रही है। डॉक्टर्स की दवाईयां भी मेरा दर्द कम नहीं कर पा रही है। मैं इस दर्द और पीड़ा को सहन नहीं कर पा रही हूं। (2) 21 दिसंबर 2012 को बेहोशी से जागने के बाद उसने अपनी मां को एक और खत लिखा कि मां दर्द की वजह से मैं ठीक से सांस नहीं ले पा रही हूं। सांस लेने में मुझे तकलीफ हो रही है। डॉक्टरों से कहो कि मुझे नींद की दवाई न दें, क्योंकि मैं सोती हूं तो कोई मेरे शरीर को नोंचता है। मैं बेबस होती हूं। सोते हुए मैं क्या समझ पाती हूं, मुझे नहीं पता। (3) निर्भया ने 22 दिसंबर 2012 को अपनी मां को तीसरी चिट्ठी लिखी और कहा कि मेरे आसपास के सारे शीशे तोड़ दो। मैं अपना चेहरा नहीं देखना चाहती। मैं नहाना चाहती हूं। मेरे शरीर से जानवरों के खून के बदबू आ रही है। मुझे अपने शरीर से नफरत हो रही है। मुझे छोड़कर मत जाना मां। (4) निर्भया ने 23 दिसंबर 2012 को अपनी मां को एक और चिट्ठी लिखा, जिसमें उसने लिखा कि पापा कहां हैं ? वो मुझसे मिलने क्यों नहीं आ रहे ? पापा को कहना वों दुखी न हो। (5) निर्भया ने अपनी पांचवी चिट्ठी 25 दिसंबर 2012 को लिखी, उसने लिखा मां उन जानवरों को छोड़ना मत। किसी को भी माफ मत करना। मेरे दोस्त कैसे है| मै जीना नहीं चाहती | आखिरी चिट्ठी में दर्द निर्भया ने अपनी आखिरी चिट्ठी 26 दिसंबर 2012 को लिखी। वो मौत में समा जाना चाहती थी। उसने मां से कहा कि मुझे अब सोने दो। मुझे बहुत दर्द हो रहा है। डॉक्टर से कहकर दवाई दे दो मुझे। मां, मुझे माफ कर देना। मैं थक गई हूं। अब और दर्द नहीं झेल सकती। मैं जीना नहीं चाहती और फिर वो कोमा में चली गई। जिसके बाद वो कभी नहीं जगी और हम सबको हमेशा-हमेशा के लिए अलविदा कह दिया। आज निर्भया की आत्मा को शान्ति मिली|

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