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Nirbhaya Case: भारत की महिलाओं के लिए दोषियों की फांसी के क्या मायने हैं?

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Nirbhaya Case: भारत की महिलाओं के लिए दोषियों की फांसी के क्या मायने हैं?

दिसंबर 2012 को दिल्ली में हुए भयानक रेप केस में दोषियों को फांसी होने के साथ ही इस मामले में आखिरी चरण पूरा हो गया है. क्रूरतापूर्वक किए गए इस रेप और मर्डर केस ने पूरे भारत को हिलाकर रख दिया था. यही केस था जिसकी वजह से सरकार को महिलाओं से जुड़े अपराधों के ख़िलाफ़ और ज़्यादा कड़े कानून लाने के लिए मजबूर होना पड़ा. इनमें असाधारण मामलों में मौत के प्रावधान शामिल करना भी था. जजों को इस केस में दोषियों को मृत्युदंड देना उचित लगा और 20 मार्च को इस मामले के चार दोषियों को फांसी दे दी गई. इस अपराध को लेकर भले ही खूब शोर-शराबा हुआ लेकिन हकीकत यह है कि यह मामला अलग-अलग अदालतों में सात साल से ज़्यादा वक्त तक खिंचता रहा. पीड़िता की मां आशा देवी ने कहा कि आखिरकार उन्हें न्याय मिल गया. आशा देवी इस केस में दोषियों को फांसी दिलाने की मुहिम का चेहरा बन गई थीं. जिस जेल में इस केस के दोषियों को फांसी दी गई उसके बाहर जश्न मनाया गया. लेकिन, क्या इससे भारत में महिलाएं सुरक्षित होंगी? इसका संक्षिप्त जवाब हैः नहीं. और ऐसा इस वजह से है क्योंकि दिसंबर 2012 के बाद से महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर कार्रवाई में भले ही इजाफा हुआ है, लेकिन इस तरह की हिंसक घटनाएं अभी भी भारत में सुर्खियां बन रही हैं. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, हर साल हज़ारों रेप केस होते हैं और यह आंकड़ा हर साल बढ़ता ही जा रहा है. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (एनसीआरबी) का हालिया जारी आंकड़ा बताता है कि 2018 में पुलिस ने 33,977 रेप केस दर्ज किए. इसका मतलब है 93 रेप केस हर रोज़. ये आंकड़े सिक्के का केवल एक पहलू ही दिखाते हैं. महिलाओं से जुड़े अपराधों के ख़िलाफ़ मुहिम चलाने वालों का कहना है कि रेप और यौन हिंसा के हज़ारों मामले पुलिस के पास तक पहुंचते ही नहीं हैं. ऐसा होने पर भी रोज़ाना अख़बार रेप और यौन हिंसा की वारदातों की ख़बरों से भरे होते हैं और ऐसा लगता है कि कोई भी सुरक्षित नहीं है. इन अपराधों का शिकार एक आठ महीने की बच्ची भी हो सकती है और एक 70 से 80 साल की बूढ़ी महिला भी. इनका शिकार अमीर भी हो सकता है और गरीब भी. चाहे गांव हो या शहर हो, गली हो या अपना खुद का घर क्यों न हो, इस तरह के अपराध हर जगह हो रहे हैं. Shrotaon aapke vichar mein is case ko hamari nyay vyavastha ne theek se handle kiya ya usmein sudhar laane ki ummeed hai? aapke comments ka hamein intezar rahega.

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