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मजदूरों के पलायन पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को जरूरी बातें साफ-साफ कह दी हैं

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मजदूरों के पलायन पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को जरूरी बातें साफ-साफ कह दी हैं

उत्तर प्रदेश का बरेली. यहां मजदूरों को सैनिटाइज़ करने के नाम पर उन पर केमिकल छिड़का गया था. 30 मार्च को. सुप्रीम कोर्ट और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना को गलत बताया है. चीफ जस्टिस एसए बोबड़े और जस्टिस एल नागेश्वर राव ने 31 मार्च को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मजदूरों के पलायन को लेकर सुनवाई की. कोर्ट में सरकार की तरफ से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि अभी सड़क पर कोई मजदूर नहीं भटक रहा है. पलायन रुक गया है. सभी मजदूरों को उनके नजदीकी शेल्टर होम्स में रखा गया है. सरकार ने भरोसा दिलाया कि मजदूरों का पूरी तरह से ध्यान रखा जा रहा है. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मजदूरों को खाने-पीने का सामान और दवाएं मुहैया कराई जाएं. कोर्ट ने साफ कर दिया कि शेल्टर होम्स का काम पुलिस को न दिया जाए. शेल्टर होम में रह रहे किसी भी मजदूर से जबरदस्ती न की जाए. चीफ जस्टिस बोबडे ने कहा कि लोगों में फेक न्यूज और अधूरी जानकारी की वजह से डर है. वायरस से ज्यादा खतरनाक फेक न्यूज है. कोर्ट ने सरकार से लोगों की समस्याओं को सुलझाने के लिए 24 घंटे में एक्सपर्ट कमिटी बनाने का कहा है. साथ ही फेक न्यूज फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश दिया. चीफ जस्टिस ने कहा कि मजदूरों की मानसिक हालत पर भी ध्यान दिया जाए. इस बारे में सरकार की तैयारी के बारे में पूछा गया. तुषार मेहता ने बताया कि मजदूरों की मदद के लिए जिला स्तर पर मौजूद काउंसलर्स की मदद ली जाएगी. कोर्ट ने कहा कि मानसिक हेल्थ पर पेशेवर लोगों के साथ ही सभी धर्मों के धर्म गुरुओं की मदद भी ली जाए. दूसरी तरफ सीएम योगी आदित्य ने बरेली की घटना के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं. साथ ही आगे से इस तरह की हरक़त दोबारा न हो इसके लिए अधिकारियों को चेताया है.

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