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बूचड़खाना बंद, तो चिड़ियाघर में ही बना कसाईखाना

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बूचड़खाना बंद, तो चिड़ियाघर में ही बना कसाईखाना

कोरोनावायरस की वजह से पूरे देश में लॉकडाउन है और दिल्ली के चिड़ियाघर भी पूरी तरह से बंद पड़े हैं. जिस वजह से चिड़ियाघर में रह रहे मांसाहारी जानवरों के लिए मांस की व्यवस्था करने की समस्या दिक्कत सामने आ रही थी. मांस आपूर्ति की समस्या का हल करने के लिए चिड़ियाघर में ही कसाईखाने की व्यवस्था की गई है. 21 दिनों के राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन की घोषणा के बाद से गाजीपुर बूचड़खाने को पूरी तरह बंद करा दिया गया था, जिस वजह से चिड़ियाघर को रोजाना मांस की आपूर्ति की दिक्कत सामने आ रही थी. चिड़ियाघर के अधिकारियों ने अब जानवरों के दैनिक आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था कर दी है. पूर्वी दिल्ली नगर निगम ने चिड़ियाघर अधिकारियों को जानवरों को खिलाने के लिए अपने खुद के परिसर में जानवरों का वध करने की अनुमति दी , जिसके बाद अब चिड़ियाघर के अंदर ही जानवरों के लिए खाने का इंतजाम किया जा रहा है. चिड़ियाघर के निदेशक सुनेश बक्सी ने बताया कि खे जाने वाले सभी मांसाहारी प्रजातियों की आहार आवश्यकता को पूरा करने की व्यवस्था हो गई है. मांसाहारी प्रजातियों के लिए रोजाना 250 किलो से 300 किलो तक मांस कर जरूरत होती है. उन्होंने बताया, "नौ बाघ, चार शेर, चार जगुआर, चार चीता और इन सभी मांसाहारी जानवरों को रोजाना 8 से 10 किलो मीट चाहिए होता है. हालांकि हमने गाजीपुर स्लाउटर हाउस बंद होने के बाद एमसीडी से इजाजत ले ली थी, जिसके बाद चिड़ियाघर के अंदर अपना कसाईखाना है, जहां दो कसाई मौजूद रहते हैं."

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