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सुरक्षा किट नहीं हैं पर्याप्त,खतरे में हमारे मेडिकल स्टाफ

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सुरक्षा किट नहीं हैं पर्याप्त,खतरे में हमारे मेडिकल स्टाफ

कोरोना वायरस के संकट से जूझते भारत में जंग के सबसे अग्रिम मोर्चे पर तैनात डॉक्टरों, नर्सों और अन्य मेडिकल स्टाफ खुद सबसे ज्यादा खतरे में हैं. बार-बार COVID19 मरीजों के सीधे संपर्क में आना इसकी पहली वजह है. दूसरी वजह है सुरक्षा किट की कमी. दूसरों की सेहत का ख्याल रखने वाले इन स्वास्थ्य कर्मियों की अपनी स्थिति बेहद चिंताजनक है. देश के कई सरकारी अस्पतालों में पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्यूपमेंट (PPE) यानि निजी सुरक्षा उपकरणों की कमी देखी गई है. शुक्रवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों ने जानकारी दी थी कि भारत में अभी तक लगभग 50 डॉक्टर और चिकित्सा कर्मचारी कोरोनावायरस की चपेट में आ चुके हैं. मुंबई के वॉकहार्ट अस्पताल में 26 नर्सों और 3 डॉक्टरों में संक्रमण फैलने और देश के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह के मामलों के सामने आने के बाद जाहिर है, अब तक ये आंकड़ा इससे काफी आगे बढ़ चुका है. यह भी पाया गया कि अस्पतालों में व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण की कमी के कारण भी डॉक्टरों और चिकित्सा कर्मचारियों को इस स्थिति से गुजरना पड़ रहा है. हालांकि चिकित्सा उपकरणों की कमी को पूरा करने के लिए रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और अन्य निजी कंपनियों को मेडिकल पेशेवरों सहित अन्य लोगों के लिए बड़े पैमाने पर पीपीई का निर्माण करने के निर्देश दिए जा चुके हैं. कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों का इलाज कर रहे डॉक्टरों, नर्सों और मेडिकल स्टाफ को सुरक्षा किट की कमी और उन्हें WHO के मानकों वाले सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने का मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया है. दिल्ली में पीपीई किट की कमी झेल रहे डॉक्टरों के लिए अच्छी खबर आई है. केंद्र सरकार दिल्ली सरकार को 27 हजार किट भेज रही है. दिल्ली सरकार खुद भी अपने स्तर पर 1 लाख 20 हजार लाख पीपीई खरीदने का आदेश दे चुकी है. मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को प्रेस कांफ्रेस के दौरान इसकी जानकारी दी. उन्होंने कहा कि पीपीई किट होने पर डॉक्टर बेखौफ होकर कोरोना मरीजों का इलाज कर पाएंगे.

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