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डॉक्टर्स सह रहे हैं प्रताड़ना? PM को मिला खत

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डॉक्टर्स सह रहे हैं प्रताड़ना? PM को मिला खत

भारत के लिए यह बेहद कठिन समय है क्योंकि कोरोना वायरस महामारी के खिलाफ लड़ाई का नेतृत्व कर रहे हमारे डॉक्टर और चिकित्साकर्मी भी कोरोना वायरस के निशाने पर हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 3 अप्रैल तक देश भर में 50 से अधिक मेडिकल स्टाफ कोरोना संक्रमित पाए जा चुके हैं. ऐसे मामले लगातार बढ़ रहे हैं. एक महीने से मेडिकल बिरादरी की ओर से पीपीई और अन्य सुरक्षा उपकरणों की कमी की तमाम शिकायतें आ रही हैं. डॉक्टरों की ये शिकायतें बढ़ती जा रही हैं. इसके साथ ही अब एक नई परेशानी आ रही है. जो डॉक्टर प्रोटेक्टिव गियर या खराब स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर सोशल मीडिया पर आलोचना कर रहे हैं, उन्हें प्रबंधन की ओर से परेशानी का सामन करना पड़ रहा है. नई दिल्ली के एम्स के रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन ने सोमवार को पीएम मोदी को पत्र लिखकर डॉक्टरों के खिलाफ इस "कठोर प्रतिक्रिया" के बारे में शिकायत की है. इस एसोसिएशन में करीब 2500 डॉक्टर हैं. एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री को लिखा है, "हमारे अगली कतार के हेल्थकेयर कर्मचारी-डॉक्टर, नर्स और अन्य सहायक कर्मचारी पीपीई, COVID परीक्षण उपकरण और क्वारनटीन सुविधाओं की उपलब्धता से संबंधित अपनी समस्याओं और मुद्दों के साथ सोशल मीडिया पर आगे आए हैं. अधिकारियों को इन सूचनाओं को रचनात्मक रूप से देखना चाहिए. अपने साथियों और मरीजों के कल्याण के लिए डॉक्टरों के प्रयासों की सराहना करने के बजाय उन्हें 'कठोर प्रतिक्रिया' मिल रही है." इसके अलावा , कलकत्ता उच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगाल पुलिस को गुरुवार को निर्देश दिया कि उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में तैनात एक डॉक्टर का जब्त किया गया मोबाइल फोन और सिम कार्ड वापस किया जाए. डॉक्टर इंद्रनील खान ने बुधवार को अदालत में अपील की थी कि उन्होंने फेसबुक और ट्विटर पर कुछ पोस्ट डाली थी, जिसके बाद साउथ 24 परगना जिले के महेस्ताला पुलिस स्टेशन में उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई और पुलिस द्वारा उत्पीड़न किया जा रहा है.

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