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कोरोना तो कोरोना, चीन के कारोबारी 'अटैक' के खिलाफ भी दुनिया एकजुट

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कोरोना तो कोरोना, चीन के कारोबारी 'अटैक' के खिलाफ भी दुनिया एकजुट

चीन अपने यहां कोरोना पर लगभग काबू पा चुका है और अब यह मौजूदा हालात में दुनिया के दूसरे देशों की कमजोरी का फायदा उठाकर उनकी कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए कारोबारी 'अटैक' में लग गया है. लेकिन इस बार दुनिया सचेत है और भारत सहित कई देशों ने चीनी अधिग्रहण से बचने के लिए अपने यहां के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नियमों को सख्त बनाया है. खबरों के अनुसार, चीन कोरोना के कहर से पस्त दुनिया की इकोनॉमी का फायदा उठाते हुए कई देशों की कंपनियों में हिस्सेदारी बढ़ाने में लग गया है. भारत सहित कई देश चीन की दिग्गज सार्वजनिक कंपनियों के अपने यहां बढ़ते निवेश को रोकने की कोशिश में लग गए हैं. सबसे पहले यूरोपीय संघ ने अपने एफडीआई नियमों में बदलाव किया. यूरोपीय संघ के कई सदस्य देशों ने चीन के 'बारगेन हंटिंग' को रोकने के लिए विदेशी निवेश पर अंकुश वाले नियम लाए. जर्मनी, फ्रांस, इटली, स्पेन सहित कई देशों ने इसे अपनाया. 30 मार्च को ऑस्ट्रेलिया ने भी विदेशी अधिग्रहण के नियमों को अस्थायी रूप से सख्त कर दिया. 18 अप्रैल, 2020 को कनाडा ने भी अपने विदेशी निवेश नियम को सख्त बना दिया. इसी तरह, ब्रिटेन में सैन्य, कंप्यूटर हार्डवेयर, क्वांटम टेक्नोलॉजी आदि में अधिग्रहण बिना सरकारी मंजूरी के अब नहीं हो सकती. अमेरिका में विदेशी कंपनियों द्वारा किसी भी संभावित खरीद की जांच के लिए विदेशी निवेश समितिसक्रिय भूमिका निभा रही है. इस सूची में सबसे नया नाम भारत का है. भारत सरकार ने 17 अप्रैल को एफडीआई नियमों में बदलाव करते हुए कहा कि 'मौजूदा कोविड—19 महामारी के दौर में भारतीय कंपनियों के अवसरवादी अधिग्रहण/खरीद पर अंकुश के लिए ऐसा किया जा रहा है.'

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