content-cover-image

कच्चा तेल शून्य से भी नीचे! भारत के लिए क्यों है चिंताजनक?

मुख्य खबरें

00:00

ट्रेंडिंग रेडियो

कच्चा तेल शून्य से भी नीचे! भारत के लिए क्यों है चिंताजनक?

अमेरिकी वायदा बाजार में कच्चा तेल सोमवार को ऐतिहासिक रूप से लुढ़कते हुए नेगेटिव में चला गया, शून्य से 36 डॉलर नीचे. क्या है इसका मतलब और भारत को इससे क्या फर्क पड़ता है? आइए समझते हैं इस तेल का खेल... यह रेट मौजूदा यानी तत्काल के हाजिर बाजार के लिए नहीं है. यह वायदा बाजार के लिए है. असल में दुनियाभर में लॉकडाउन को देखते हुए जिन कारोबारियों ने मई के लिए वायदा सौदे किए हैं वे अब इसे लेने को तैयार नहीं हैं. उनके पास पहले से इतना तेल जमा पड़ा है जिसकी खपत नहीं हो रही है. इसलिए उत्पादक उन्हें अपने पास से रकम देने को तैयार हैं कि आप हमसे खर्च ले लो, लेकिन कच्चा तेल ले जाओ यानी सौदे को पूरा करो. ऐसा कच्चे तेल के इतिहास में पहली बार हुआ है. अब इस बात को समझना जरूरी है कि वैसे अमेरिकी बाजार में कच्चा तेल अगर मुफ्त भी हो जाता है तो पेट्रोलियम कीमतों के लिहाज से भारत को बहुत फर्क क्यों नहीं पड़ता. असल में भारत में जो तेल आता है वह लंदन और खाड़ी देशों का एक मिश्रित पैकेज होता है जिसे इंडियन क्रूड बास्केट कहते हैं. इंडियन क्रूड बास्केट में करीब 80 फीसदी हिस्सा ओपेक देशों का और बाकी लंदन ब्रेंट क्रूड तथा अन्य का होता है. यही नहीं दुनिया के करीब 75 फसदी तेल डिमांड का रेट ब्रेंट क्रूड से तय होता है. यानी भारत के लिए ब्रेंट क्रूड का रेट महत्व रखता है, अमेरिकी क्रूड का नहीं. जब भी कच्चा तेल गिरता है तो तमाम तरफ यह शोर मचने लगता है कि पेट्रोल-डीजल के रेट कम क्यों नहीं हो रहे. असल में भारत में पेट्रोल-डीजल के रेट क्रूड के ऊपर नीचे जाने से तय नहीं होते. पेट्रोलियम कंपनियां हर दिन दुनिया में पेट्रोल-डीजल का एवरेज रेट देखती हैं. यहां कई तरह के केंद्र और राज्य के टैक्स निश्चित हैं. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का सस्ता होना, भारत के लिए कुछ मोर्चों पर अच्छी खबर मानी जा सकती है. केडिया कमोडिटी के प्रमुख अजय केडिया के मुताबिक हम भंडारण क्षमता बढ़ाकर इस मौके का फायदा उठा सकते हैं. अगर भंडारण क्षमता बढ़ाने पर तेजी के साथ काम हो तो लंबे समय तक निश्चिंत रहा जा सकता है. इसके अलावा सरकार एक बार फिर टैक्स बढ़ा, तेल से कमाई कर राजकोषीय घाटे को कम कर सकती है.

Show more
content-cover-image
कच्चा तेल शून्य से भी नीचे! भारत के लिए क्यों है चिंताजनक?मुख्य खबरें