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पशुओं के भोजन को लेकर PETA चिंतित, राज्य सरकारों को लिखा पत्र

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पशुओं के भोजन को लेकर PETA चिंतित, राज्य सरकारों को लिखा पत्र

कोरोना वायरस की महामारी के कारण देश में लॉकडाउन लागू है. 3 मई तक लागू लॉकडाउन के कारण आवश्यक वस्तुओं को छोड़कर अन्य दुकानें बंद हैं. केवल राशन, फल-सब्जी, स्टेशनरी और पंखे की दुकानों के साथ मेडिकल स्टोर ही खुले हैं. ऐसे में पालतू पशुओं के खाने में प्रयुक्त होने वाली वस्तुओं की किल्लत हो गई है. कोरोना वायरस के खतरे और खाने की वस्तुओं की किल्लत के कारण बड़ी संख्या में लोग अब अपने पालतू पशुओं को छोड़ रहे हैं. पशुओं के लिए खाने का संकट तो है ही. अब पशुओं के लिए काम करने वाली संस्था पीपुल्स फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स यानि पेटा ने इसे गंभीरता से लिया है. पेटा ने राज्य सरकारों को पत्र लिखकर पालतू पशुओं के लिए खाद्यान्न के तौर पर उपयोग में लाई जाने वाली वस्तुओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा है. पेटा ने सरकारों से ऐसे लोगों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई करने की अपील की है, जो लोग पालतू पशुओं को ऐसे छोड़ दे रहे हैं. पेटा ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकार को लिखे पत्र में अपील की है कि किसी भी पालतू जानवर को छोड़ने के लिए ऐसा करने वाले व्यक्ति या पालतू पशु को भूखा छोड़ने वाले दुकानदारों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई करे. इस संबंध में केंद्र सरकार के संगठन एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया ने भी 11, 23 और 24 मार्च को एडवाइजरी जारी की थी. पशुओं के स्वास्थ्य के लिए कार्य करने वाली वैश्विक संस्था ने भी साफ किया था कि कोरोना वायरस इंसान से इंसान में फैलने वाला वायरस है. पशुओं से इस वायरस के प्रसार का कोई सबूत नहीं है.

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