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प्रधानमंत्री को CM की चिट्ठी- छात्रों को वो ला सकते हैं तो हम क्यों नहीं?

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प्रधानमंत्री को CM की चिट्ठी- छात्रों को वो ला सकते हैं तो हम क्यों नहीं?

कोरोना वायरस के चलते देशभर में लागू लॉकडाउन के बीच कई राज्यों ने अपने छात्रों और प्रवासी मजदूरों को वापस लाने का काम शुरू कर दिया है. ऐसा करने वाला उत्तर प्रदेश सबसे पहला राज्य बना. जिसका बिहार के सीएम नीतीश कुमार लगातार विरोध कर रहे हैं. लेकिन अब झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी केंद्र सरकार से पूछा है कि क्या छात्रों और प्रवासी मजदूरों की वापसी लॉकडाउन की गाइडलाइन का उल्लंघन नहीं है? हेमंत सोरेन ने इस मामले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक चिट्ठी लिखी है. जिसमें उन्होंने कहा है कि उनकी सरकार लगातार केंद्र के हर नियम का पालन कर रही है. गृह मंत्रालय द्वारा डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट 2005 के तहत जारी दिशा निर्देशों को देखते हुए कड़ी कार्रवाई भी हो रही है. लेकिन कुछ राज्य रोजाना गृहमंत्रालय की तरफ से जारी आदेशों का उल्लंघन कर रहे हैं. सोरेन ने छात्रों और प्रवासी मजदूरों की वापसी वाली खबरों को लेकर चिट्ठी में लिखा कि समाचार पत्रों तथा टीवी चैनलों के माध्यम से जो जानकारी प्राप्त हो रही है उससे पता चलता है कि अन्य राज्यों की तरफ से भारत सरकार के आदेशों का घोर उल्लंघन किया जा रहा है. झारखंड के 5 हजार से ज्यादा बच्चे कोटा तथा देश के अन्य शहरों में लॉकडाउन के कारण फंसे हुए हैं. साथ ही करीब 5 लाख से ज्यादा झारखंड के मजदूर जो अन्य राज्यों में रोजगार की तलाश में गए थे आज वापस आना चाहते हैं. झारखंड के सीएम सोरेन ने केंद्र पर हमला बोलते हुए कहा, ऐसे राज्यों से केंद्र सरकार ने किसी भी तरह का कोई स्पष्टीकरण नहीं मांगा है, वहीं इन राज्यों पर डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट के प्रावधानों के तहत कार्रवाई किए जाने का भी कोई मामला सामने नहीं आया है. सोरेन ने प्रधानमंत्री से अपील करते हुए कहा कि गृहमंत्रालय की तरफ से राज्यों में फंसे छात्रों और मजदूरों को वापस लाने के लिए दिशा निर्देश जारी किए जाएं. जिसके बाद कानूनी तौर पर उनकी राज्य में वापसी हो सके.

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