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मजदूरों की वापसी को मंजूरी, लेकिन राज्यों के सामने ये बड़ी चुनौती

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मजदूरों की वापसी को मंजूरी, लेकिन राज्यों के सामने ये बड़ी चुनौती

लॉकडाउन के बीच प्रवासी मजदूरों और दूसरे राज्यों में फंसे छात्रों और पर्यटकों के लिए एक राहत भरी खबर आई है. केंद्र सरकार ने कुछ शर्तों के साथ राज्यों को लोगों की वापसी को लेकर इजाजत दे दी है. लेकिन अब तक केंद्र के आदेश का हवाला दे रहे राज्यों के पाले में गेंद आ चुकी है. जिसके बाद राज्यों की जिम्मेदारी है कि वो अपने प्रवासी मजदूरों और छात्रों को वापस लाते हैं या फिर नहीं. लेकिन अगर राज्य ये फैसला लेते हैं तो कितने लोगों की घर वापसी होगी? अगर वापसी हो भी जाती है तो फिर उन लोगों को रोजगार देने, उनके लिए स्वास्थ्य सुविधाएं, कोरोना की चांज जैसी चीजें एक साथ कैसे हो पाएंगी? सबसे पहले बात करते हैं उस राज्य की जिसने, केंद्र के निर्देशों से पहले ही प्रवासी मजदूरों की वापसी शुरू कर दी थी. उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार अब तक हजारों प्रवासी मजदूरों और सैकड़ों छात्रों को राज्य में वापस ला चुकी है. बिहार जो अब तक केंद्र के निर्देशों का हवाला देते हुए लोगों को ये समझाने की कोशिश कर रहा था कि वो लॉकडाउन के नियमों का उल्लंघन नहीं कर सकता है, उसे अब केंद्र के निर्देशों के बाद लोगों की वापसी को लेकर रोडमैप तैयार करना होगा. उत्तराखंड भी एक ऐसा राज्य है, जहां लाखों की संख्या में पलायन हुआ है. झारखंड भी एक ऐसा राज्य है, जहां से लाखों की संख्या में कामगार अन्य राज्यों में आते हैं. ऐसे कई और राज्य हैं, जिनके लाखों लोग बाहरी राज्यों में काम करने के लिए निकले और लॉकडाउन में फंसे हैं. लेकिन अब राज्यों के सामने दो तरह की चुनौतियां हैं. एक चुनौती तो ये है कि लाखों लोगों का बोझ अचानक राज्य कैसे झेल पाएगा और दूसरी तरफ अगर लोगों की वापसी नहीं होती तो आने वाले वक्त में उनके राजनीतिक करियर के लिए ये खतरे की घंटी साबित हो सकता है. तो फिलहाल राज्यों के लिए ये एक ऐसा गरम दूध है जिसे ना वो निगल सकते हैं और ना ही थूक सकते हैं.

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