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तब तो जीवन के लिए यह लॉकडाउन अच्छा है!

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तब तो जीवन के लिए यह लॉकडाउन अच्छा है!

लॉकडाउन में दुर्घटनाएं कम हो रही हैं, यह बात तो समझ आती है, लेकिन अचानक तबीयत बिगड़ जाने पर मरीजों को अस्पताल लाने और आपात परिस्थिति में मरीजों की मौत के मामले कम हो गए हैं, इसे क्या समझना चाहिए? आंकड़े बताते हैं कि कोरोना काल में देश में हर्ट अटैक, स्ट्रोक और दूसरे कारणों से इमर्जेंसी में अस्पताल आने वाले मरीजों की संख्या कम हो गई है। बातचीत में डॉक्टरों ने इसके संभावित कारण बताए। इनमें लॉकडाउन में भागदौड़ और जिम्मेदारियों से मुक्ति के कारण तनाव घटने और प्रदूषण में कमी जैसी वजहें तो स्वाभाविक हैं। इनके अलावा, यह भी हो रहा है कि लोगों की जिंदगी में डॉक्टरों की दखल भी कम हो गई है। BMC के मुताबिक, डाइबिटीज, हाइपरटेंशन और हर्ट प्रॉब्लम से मरने वालों की संख्या 2017 के मार्च महीने में 729, 2018 के मार्च में 833, 2019 के मार्च में 937 थी जबकि इस मार्च में महज 595 रही। हाल ही में न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने भी ऐसी ही रिपोर्ट प्रकाशित की थी जिसमें कहा गया था कि पिछले साल के मार्च महीने के मुकाबले बीते मार्च में शवदाह गृहों का कारोबार मंदा रहा।

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