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आज की मुस्कान: इरादें हो अटल तो सफलता चूमती है कदम

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आज की मुस्कान: इरादें हो अटल तो सफलता चूमती है कदम

सुप्रभात ! एक बार फिर स्वागत है आपका मुख्य ख़बरों की पेशकश 'आज की मुस्कान' में, जैसे नाम , वैसा इसका काम , आपके चेहरे पर प्रतिदिन मुस्कान लाना ही हमारा मकसद है. और इस प्रयत्न में हम आपको बता रहे हैं शशांक मिश्रा के बारे में, जहां लाख सुख-सुविधाओं के बावजूद आईएएस एग्जाम पास करना अत्यंत दुर्लभ माना जाता है, वहीं यूपी के शशांक उनमें से हैं जिन्होंने बिस्किट खाकर और ट्रेन में पढ़ाई करके यूपीएससी के इस एग्जाम को न केवल पास किया बल्कि पांचवीं रैंक भी हासिल की. शशांक की सफलता की राह में न जाने कितने रोड़े थे लेकिन यह जिद्दी इंसान भी हर मुश्किल के सामने डट कर खड़ा हो जाता था, मानो कह रहा हो आओं देखें किसमें कितना है दम. पर ऐसे में इन परेशानियों पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय शशांक अर्जुन की तरह अपनी निगाह लक्ष्य पर रखते थे. मेरठ को बिलांग करने वाले शशांक मिश्रा स्टूडेंट्स के लिये प्रेरणास्त्रोत हैं. शशांक ने जिन हालातों में आईएएस की परीक्षा न केवल पास की बल्कि पांचवी रैंक भी हासिल की वह काबिले-तारीफ है. शशांक जब कक्षा 12वीं में थे तो उनके पिता की असमय मृत्यु हो गयी. इसलिए उनके पास कोई सुख सुविधा तो छोड़ो खाने को भरपेट खाना तक नहीं था फिर भी वह दिन रात मेहनत करके न सिर्फ अपनी फीस भर रहे थे साथ ही परिवार की जिम्मेदारी भी उठा रहे थे. यूपीएससी की परीक्षा के कठिनाई स्तर को शशांक भली प्रकार समझते थे. उन्होंने पहले दो साल जमकर परीक्षा की तैयारी की और उसके बाद पेपर दिया. पहले ही प्रयास में उनका चयन एलाइड सर्विसेज़ में हो गया लेकिन इससे भी उनका दिल नहीं भरा. उन्होंने दोबारा कोशिश की और अपने पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ते हुये 2007 की परीक्षा में पांचवी रैंक हासिल की. शशांक की सालों की मेहनत का फल आखिरकार उन्हें मिल ही गया. शशांक इस बात का जीता – जागता प्रमाण हैं कि जीवन में सफल वे नहीं होते जिनके रास्ते में बाधाएं नहीं आतीं बल्कि वे होते हैं जो कितनी भी बाधाओं के बावजूद अपना रास्ता नहीं बदलते. वर्तमान में शशांक मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के कलेक्टर पद पर कार्यरत हैं.

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