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मजदूरों के किराए पर कोहराम, विपक्ष ने केंद्र को घेरा

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मजदूरों के किराए पर कोहराम, विपक्ष ने केंद्र को घेरा

कोरोना वायरस की वजह से देश में 24 मार्च के बाद से ही लॉकडाउन लगा हुआ है. करीब 37 दिन के बाद देश के अलग-अलग हिस्सों में फंसे प्रवासी मजदूरों को घर वापस जाने का मौका मिला. राज्य सरकार की अपील के बाद केंद्र ने इनके लिए स्पेशल ट्रेन चलाई, लेकिन अब किराए को लेकर बवाल हो गया. विपक्ष ने आरोप लगाया है कि रेलवे मुश्किल वक्त में मजदूरों से ही किराया वसूल रहा है. इस मामले की शुरुआत तब हुई जब रेलवे की ओर से प्रवासी मजदूरों को घर पहुंचाने के लिए श्रमिक ट्रेन की शुरुआत हुई. राज्य सरकार की अपील पर चल रही ट्रेनों में मजदूरों को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए वापस ले जाया जा रहा है. लेकिन विपक्ष की ओर से आरोप लगाया गया कि रेलवे की ओर से जो पहले आदेश आया था, उसमें बताया गया कि मजदूर टिकट का पैसा राज्य सरकार को देगी, जिसके बाद राज्य रेलवे को सौंपेंगे. रेलवे की इस चिट्ठी पर बवाल हुआ, जिसके बाद कई राज्य सरकारों और राजनीतिक दलों ने सवाल खड़े किए. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने रेलवे से अपील करते हुए कहा कि मजदूरों से टिकट का पैसा ना लें, ऐसी ही अपील कई अन्य राज्य सरकारों ने भी की. केरल और महाराष्ट्र में मजदूरों से यात्रा के लिए 800 रुपये तक की रकम वसूली गई. वहीं राजस्थान में रेलवे की ओर से पैसे ना मिलने पर यात्रियों का ना बैठाने को कहा गया. सोमवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने इसी मसले पर एक बयान जारी किया. सोनिया गांधी की ओर से कहा गया कि कांग्रेस की प्रदेश इकाई जरूरतमंद मजदूरों के टिकट का पूरा खर्च उठाएगी. इसके बाद कांग्रेस की ओर से सरकार पर हमला तेज हो गया, राहुल गांधी-प्रियंका गांधी-अहमद पटेल समेत हर बड़े कांग्रेसी नेता ने सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए. कांग्रेस के अलावा लेफ्ट नेता सीताराम येचुरी ने भी इस मसले पर मोदी सरकार पर सवाल उठाए. उन्होंने लिखा कि जो मजदूर पिछले दो महीनों से कुछ कमाई नहीं कर पा रहे हैं, उन्हें ट्रेन टिकट का खर्च उठाने को कहा जा रहा है. जब केंद्र की ओर से कोई मदद ही नहीं मिल रही है तो राज्य सरकारें भी इस खर्च को कैसे उठाएंगी.

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