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आज की मुस्कान: आमदनी बहुत नहीं, पर लावारिस बेज़ुबानों को वर्षों से खिलाते हैं खाना

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आज की मुस्कान: आमदनी बहुत नहीं, पर लावारिस बेज़ुबानों को वर्षों से खिलाते हैं खाना

सुप्रभात दोस्तों, हर रात की एक सुबह होती है, ये तो आपने सुना ही होगा। लेकिन रात के अन्धकार में भी जो लोग निरंतर रौशनी बनकर ज़रूरतमंदो की ज़िन्दगी में उजाला करते हैं, उनकी ख्याति आसमान छूती है. इसी तरह कलयुग के इस दौर में भी जो व्यक्ति सिर्फ इंसानों ही नहीं, बेज़ुबान जानवरों के हित में सोचता और काम करता है, सोचिये उसका दिल कितना पाक होगा। ऐसे ही स्वर्ण से सुन्दर दिल वाले हैं बिहार के दरभंगा जिला में रहने वाले सुजीत चौधरी। उनको फिक्र है जानवरों की और वह सड़कों पर इन बेजुबानों के लिए खाना लेकर निकल जाते हैं। lockdown के दौरान अगर सबसे ज्यादा दिक्कत किसी को हो रही है तो वे हैं जानवर। लेकिन सुजीत ये काम कोई पहली बार नहीं कर रहे हैं, वह इसे मानवता मानकर लगभग 18-20 वर्षों से जुटे हैं. उनका कहना है कि मनुष्य सामाजिक जीव है और मानवता हमें सिखाती है कि किसी भी जीव की देखभाल कराना हमारा धर्म है और उसे खाना खिलाना पहला कर्तव्य। अभी तक उन्होंने बीएसफ और एसएसबी के साथ मिलकर करीब 1.5 से 2 लाख गौवंश, 7-8 हजार कुत्तों और लगभग 600 ऊंटों की रक्षा की है। वह पशुओं की रक्षा के साथ-साथ स्थानीय लोगों में जागरुकता फैलाने का भी काम करते हैं। रेस्क्यू किए गए जानवरों की देखभाल में उन्हें स्थानीय लोगों की मदद मिलती है।लॉकडाउन के दौरान सुजीत जैसे लोगों की कहानी बहुत मायने रखती है। हमें सामान्य दिनों में भी जितना संभव हो, पशु-पक्षियों की सेवा करनी चाहिए। यही सीख देती है हमे सुजीत की कहानी। ऐसी ही ख़ूबसूरत कहानियों, किस्सों और ख़बरों के लिए सुनिए मुख्य खबरें हर दिन , सिर्फ khabri app पर.

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