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KHABRI SPL: International Nurses Day | इस दौर में मां समान भूमिका निभा रहीं नर्सों की दरकार

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KHABRI SPL: International Nurses Day | इस दौर में मां समान भूमिका निभा रहीं नर्सों की दरकार

मध्य 19 वीं शताब्दी के दौरान, क्रीमियन युद्ध के समय, फ्लोरेंस नाइटिंगेल नामक एक महिला ने युद्ध से घायल सैनिकों के इलाज का जिम्मा लिया। एक पेशे के रूप में नर्सिंग का अभ्यास करने का विचार उस समय उनके दिमाग में आया और जल्द ही वह 'लेडी विद द लैंप' के नाम से प्रसिद्ध हो गईं, क्योंकि उन्होंने पेशेवर रूप से महिलाओं को नर्स के रूप में प्रशिक्षित करना शुरू कर दिया, जिससे यह एक महान पेशा बन गया। हमारे देश में मां पन्नाधाय को दूसरी मां के रूप में याद किया जाता है। पन्नाधाय मेवाड़ के महान शासक महाराणा उदयसिंह की दाई मां थी। उस महान पन्नाधाय ने अपने बेटे के प्राण न्यौछावर कर दिए थे। भारत के गाँवों में आज भी नर्स या दाई में उन्हीं का प्रतिबिंब देखा जाता है। दुनियाभर में समाज को इस कोरोना संकट के समय यह याद रखना चाहिए कि इस जंग से जीतने के लिए डॉक्टरों, नर्सों की सबसे अधिक दरकार है। इस समय दुनिया भर में नर्स और अन्य स्वास्थ्यकर्मी अपने परिवार को भूल मानवजाति को बचाने के लिए दिन-रात काम कर रहे हैं। ऐसे में नर्सों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ता है, विशेष तौर पर जो नर्सें आइसीयू में काम करती हैं, और इस समय कोविड-19 के मोर्चे पर तैनात हैं। इन्हें आराम के लिए पर्याप्त समय नहीं मिलता। नर्सों व मिडवाइफ को अक्सर समाज व मेडिकल पेशे में अपेक्षित सम्मान नहीं मिलता जबकि उनकी सेवाएं बहुत महत्वपूर्ण हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र में नर्सों को अहम कड़ी के रूप में स्वीकारते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने हाल ही में विश्व में इनकी स्थिति पर ‘द स्टेट ऑफ द वल्र्ड नर्सिंग, 2020’ रिपोर्ट जारी की है। यह अपनी तरह की पहली रिपोर्ट है। इसके साथ यह भी याद रखना होगा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन 2020 को अंतरराष्ट्रीय नर्स व मिडवाइफ वर्ष के तौर पर मना रहा है। दुनिया भर के स्वास्थ्यकर्मियों की कुल तादाद में नर्सों की संख्या लगभग 60 प्रतिशत है। इनमें 2.79 करोड़ नर्स हैं. इस कोविड-19 महामारी के दौर में नर्सों की कमी विशेष तौर पर दुनिया महसूस कर रही है। इस महामारी ने कई मुल्कों में डॉक्टरों व नर्सों की जान ले ली है और कई स्वास्थ्यकर्मी इस समय कोरोना वायरस से संक्रमित हैं। विश्व भर में 80 प्रतिशत नर्सें विश्व की 50 प्रतिशत आबादी की सेवा करती हैं। नर्सों का वितरण भी असमान है। भारत की बात करें तो हमारे देश में प्रति हजार की आबादी पर 1.7 नर्स है, जोकि विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानक से कम है। गांवों में जहां देश की करीब 65 प्रतिशत आबादी बसती है, वहां तो नर्सों की बहुत ज्यादा कमी है। एक तरफ आने वाले समय में 2030 तक सबके लिए स्वास्थ्य के लक्ष्य को हासिल करने के वास्ते दुनिया में करीब 60 लाख नर्सों की जरूरत है, वहीं यह रिपोर्ट इस बाबत चेताती भी है कि आने वाले वर्षों में नर्सों की उपलब्धता वाली स्थिति और खराब हो सकती है, क्योंकि दुनिया भर में नर्स स्टाफ की सबसे अधिक आपूर्ति करने वाले दो देशों फिलीपींस व भारत ने ऐसे संकेत दिए हैं। अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस 2020 आज, 12 मई को मनाया जा रहा है। यह दिन फ्लोरेंस नाइटिंगेल की जयंती का प्रतीक है जिन्होंने आधुनिक नर्सिंग की नींव रखी थी। कोरोना महामारी ने सरकार व समाज को स्वास्थ्यकमिर्यों की अहमयित को समझने का एक और मौका दिया है। इस अवसर को गंवाना नहीं चाहिए। हमे सुन रही देश-दुनिया की नर्सों को उनकी सेवाओं के लिए हम प्रणाम करते हैं और अंत में बस यही कहना चाहेंगे कि जीवन की डोर हो तुम, जीवन संचार हो तुम. करती नैया पार हो तुम, नर्स नहीं भगवान हो तुम !!!

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