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MANREGA का मज़ाक बनाने वाले आज उसी पर निर्भर हैं

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MANREGA का मज़ाक बनाने वाले आज उसी पर निर्भर हैं

लंबे लॉकडाउन के बाद अब प्रवासी मजदूर अपने घरों को वापस लौट चुके हैं. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या आखिर मजदूरों को उनके राज्यों में कमाई के साधन मिल पाएंगे या नहीं? इसे लेकर अब वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने गरीबों के लिए कई ऐलान किए. जिसमें मनरेगा के तहत रोजगार देने की बात कही गई. इसे लेकर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने चुटकी लेते हुए कहा कि जो लोग मनरेगा को खत्म करना चाहते थे, वो आज इसी पर निर्भर हैं. केंद्र सरकार के मनरेगा को लेकर किए गए ऐलानों के बाद कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने एक ट्वीट किया. उन्होंने ट्विटर पर लिखा कि “मनरेगा के तहत मिलने वाली मजदूरी को एक दशक में अब संशोधित किया गया है. आज वित्तमंत्री ने जो घोषणा की उसमें कुछ भी बड़ा नहीं था. कुछ भी ऐसा नहीं था जिसकी तुरंत जरूरत है. अप्रैल महीने की मजदूरी देना और मनरेगा के तहत मजदूरी के दिनों को 200 दिन तक बढ़ाना. ये विडंबना है कि जिन लोगों ने मनरेगा का मजाक बनाया वो आज इसी पर निर्भर हैं.” वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को राहत पैकेज से जुड़ी अपनी दूसरी प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि प्रवासी मजदूरों को अब मनरेगा के तहत केंद्र सरकार रोजगार दिलवाएगी. उन्होंने बताया कि इस पर काम शुरू हो चुका है इस योजना में 50 फीसदी तक रजिस्ट्रेशन बढ़ गया है. कल तक 1.87 लाख ग्राम पंचायतों में 2.33 करोड़ लोगों को काम दिया गया था जो कि पिछले साल के मई की तुलना में 40 से 50 फीसदी ज्यादा रजिस्ट्रेशन है. इससे पहले सरकार ने मनरेगा के तहत मिलने वाली मजदूरी को 182 रुपये से बढ़ा कर 202 रुपये किया था.

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