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डिस्चार्ज पॉलिसी में बदलाव ने भारत में कोरोना रिकवरी रेट को कैसे बढ़ा दिया?

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डिस्चार्ज पॉलिसी में बदलाव ने भारत में कोरोना रिकवरी रेट को कैसे बढ़ा दिया?

भारत में 34,000 से अधिक लोग SARS-CoV2 वायरस से रिकवर हो चुके हैं, और रिकवरी दर लगातार बढ़ रही है. लेकिन 17 मई की सुबह तक भारत दुनिया में सक्रिय केसों की सबसे ज्यादा पूर्ण संख्या को लेकर 8वें स्थान पर है. वहीं प्रतिशत के संदर्भ में भारत पांचवें नंबर पर है. भारत से आगे अमेरिका, रूस, फ्रांस और ब्राजील हैं. रिकवरी रेट कई फैक्टर्स का एक फंक्शन है – इनमें एक देश की मृत्यु दर, अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता वाले केसों की संख्या, देखभाल की क्वालिटी और डिस्चार्ज पॉलिसी शामिल है. महामारी की शुरुआत में भारत का रिकवरी रेट 10-11% ही था जो लगातार सुधर रहा है. महामारी के बढ़ने के साथ ये अपेक्षित था, लेकिन इससे भारत को हल्के केसों (Mild Cases) में अपनी डिस्चार्ज नीति को ढीला करने का मौका मिल सकता है. अब ऐसे केसों में व्यक्ति को छुट्टी देने के लिए निगेटिव टेस्ट की आवश्यकता नहीं रहेगी, जब तक कि वे गंभीर लक्षण नहीं दिखाएंगे. समय के साथ, भारत में सक्रिय केसों में बढ़ोतरी कुल बढ़ोतरी दर की तुलना में धीमी रही है, जो रिकवरी की बढ़ती संख्या को दर्शाता है. कम से कम 100 केस वाले राज्यों में, केरल में सबसे अच्छा रिकवरी रेट है. ये इस तथ्य को भी दिखाता है कि केरल ने सबसे पहले केसों की शुरुआत देखी थी. पंजाब का रिकवरी रेट लगातार नीचे बना हुआ है जो चिंताजनक है. पंजाब जैसी ही स्थिति केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ में है. भारत का रिकवरी रेट अमेरिका से बेहतर है, लेकिन कई यूरोपीय देशों से अब भी पीछे है. जर्मनी में खास तौर पर बहुत ऊंचा रिकवरी रेट है.

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