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आज की मुस्कान: हर मुसीबत में किसान ही है अन्नदाता !

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आज की मुस्कान: हर मुसीबत में किसान ही है अन्नदाता !

तमिलनाडु के इरोड नामक इलाके के 38 वर्षीय किसान जीएम मथेश कहते हैं कि जब देश में लॉकडाउन शुरू हुआ तो उनके पास दो रास्ते थे। एक रास्ता था व्यवसाय में मुनाफा कमाने का और दूसरा रास्ता था जरूरमंदों की सहायता करना। उन्होंने जरूरमंदों की मदद करना का रास्ता चुना। मथेश अपने परिवार में तीसरी पीढ़ी के किसान हैं। उन्होंने हाल ही में सब्जियों की कटाई की थी। जब उन्हें पता चला कि उनके गाँव के कई दिहाड़ी मजदूर लॉकडाउन के कारण कमाई नहीं कर पा रहे हैं और अपने परिवार का पेट पालने के लिए संघर्ष कर रहे हैं तब उन्होंने सब्जी बांटने का फैसला लिया। मथेश कहते हैं, "हालांकि उन्हें राशन की दुकानों से चावल और दाल मिल जाती है , लेकिन सब्जियों के बिना एक स्वस्थ भोजन अधूरा होता है। इसलिए मैंने अपनी सारी उपज ऐसे परिवारों को मुफ्त में देने का फैसला किया।" अपने दोस्तों और परिवार की मदद से घर-घर जाकर, मथेश ने 800 से अधिक गरीब परिवारों को मुफ्त में लगभग 8 टन सब्जियां वितरित किये हैं। मथेश सोशल डिस्टेंसिंग के मानदंडों का पालन करते है, लेकिन सरकार ने लॉकडाउन नियमों को सख्त बना दिया है, वे अब स्थानीय अधिकारियों के साथ समन्वय करने की योजना बना रहे हैं ताकि जरूरतमंदों तक जरुरी वस्तुएं पहुंचाना संभव हो पाए। मथेश का मानना है कि एक समुदाय के रूप एकजुट हो कर हम इस कठिन समय को दूर कर सकते हैं। वह उम्मीद करते हैं कि लॉकडाउन खत्म होने तक जरूरतमंदों तक वे ऐसे ही मुफ्त सब्जियां देते रहेंगे । निस्वार्थ दूसरों करने की उनकी इस भावना को हमारा सलाम।

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