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क्या अब कोरोना को लेकर प्रेस के सामने आने से बच रहा है स्वास्थ्य मंत्रालय?

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क्या अब कोरोना को लेकर प्रेस के सामने आने से बच रहा है स्वास्थ्य मंत्रालय?

जबसे कोरोना वायरस का इंफेक्शन देश में तेज़ी से फैलना शुरू हुआ है, तब से स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारी लगातार मीडिया को इससे जुड़ी जानकारी देते रहे. शुरुआत में कुछ दिन तक लगातार प्रेस ब्रीफिंग हुई. फिर हफ्ते में तीन से चार दिन और अब हेल्थ मिनिस्ट्री को प्रेस ब्रीफिंग दिये आठ दिन हो चुके हैं. कोरोना वायरस को लेकर आखिरी ब्रीफिंग 11 मई को हुई थी. इसे लेकर एक्सपर्ट्स ने चिंता जाहिर की है. उनका कहना है कि महामारी के दौर में ये जरूरी है कि लोगों को ज्यादा से ज्यादा और सही जानकारी दी जाए. प्रधानमंत्री की वित्तीय सलाहकार समिति की सदस्य रह चुकीं प्रोफेसर शमिका रवि इस बारे में कहती हैं, “इस वक्त सबसे बड़ी ज़रूरत है लोगों के बीच से डर कम करना. और डर कम करने का एक ही ज़रिया है- उन्हें ज़्यादा से ज़्यादा जानकारी देना.” यही बात डॉक्टर गिरधर ज्ञानी भी कहते हैं. डॉ ज्ञानी कोरोना वायरस के इलाज़ से जुड़े अस्पतालों के लिए बनाई गई टास्क फोर्स के सदस्य हैं. वे कहते हैं, “लोगों के बीच भविष्य को लेकर अभी भी अनिश्चितता है. लोग सोच रहे हैं कि क्यों केस लगातार बढ़ते जा रहे हैं. वो सुन रहे हैं कि अब हमें वायरस के साथ ही जीने की आदत डाल लेनी चाहिए. इतनी सारी आशंकाओं के बीच जानकारियां साझा करना रोका नहीं जाना चाहिए.” फिलहाल स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन की तरफ से रोज़ाना स्टेटमेंट जारी किया जा रहा है. इस स्टेटमेंट में कोरोना वायरस से जुड़े दिनभर के अपडेट और आंकड़े होते हैं.

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