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भारत का नाम लिए बगैर नेपाल ने कहा, लिपुलेख-कालापानी को वापस लेकर रहेंगे

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भारत का नाम लिए बगैर नेपाल ने कहा, लिपुलेख-कालापानी को वापस लेकर रहेंगे

नेपाल के प्रधानमंत्री केपी ओली ने कहा कि तिब्बत, चीन और भारत से सटे कालापानी, लिपुलेख और लिंपियाधूरा को किसी भी कीमत पर वापस लाया जाएगा। प्रधानमंत्री ओली ने भारत का नाम लिए बगैर कहा कि अब हम लगातार इन इलाकों को कूटनीतिक जरिए से वापस लाने में जुटेंगे। अगर इससे कोई नाराज होता है तो हमें फर्क नहीं पड़ता। दो महीने पहले ओली का किडनी ट्रांसप्लांट हुआ है। इसके बाद वे मंगलवार को संसद पहुंचे। इस दौरान स्पीकर अग्नि सपकोटा ने उन्हें बैठकर भाषण देने की इजाजत दी। ओली नेपाल की कैबिनेट से नए राजनीतिक नक्शे को मंजूरी के बाद सीमा विवाद पर बोल रहे थे। इंडियन आर्मी चीफ एमएम नरवणे ने कहा था कि कालापानी, लिपुलेख और लिंपियाधूरा पर नेपाल के विरोध के पीछे किसी और का हाथ है। नेपाल के प्रधानमंत्री ने इस पर जवाब दिया- हम जो भी करते हैं, खुद ही करते हैं। भारत के साथ दोस्ताना संबंध रखना चाहते हैं। पर यह भी पूछना चाहता हूं कि भारत की नीति क्या है? सीमामेव जयते या सत्यमेव जयते? ओली ने इस आरोप को भी नकारा कि जब उन्हें पार्टी में ही विद्रोह का सामना करना पड़ा था, तब चीनी राजदूत होउ यान्की ने उनकी कुर्सी बचाने में मदद की थी। ओली ने कहा, ‘‘कुछ लोग कहते हैं कि एक विदेशी राजदूत ने सत्ता में उनकी कुर्सी बचाई है। यह सरकार नेपाल के लोगों ने चुनी है और कोई भी मुझे नहीं हटा सकता।’’

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