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KHABRI SPL: ईद पर इस बार 'प्रेमचंद का हामिद' नहीं जाएगा ईदगाह !

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KHABRI SPL: ईद पर इस बार 'प्रेमचंद का हामिद' नहीं जाएगा ईदगाह !

इस बार 'हामिद' ईदगाह नहीं जाएगा, न ही अपने किसी प्रिय के लिए कोई तोहफ़ा ख़रीदेगा, जैसे कि प्रेमचंद की कालजयी रचना ईदगाह में उसने दादी के लिए चिमटा ख़रीदा था. हामिद के पास ग़ुरबत की वजह से नए कपड़े नहीं थे लेकिन इस बार हामिद जैसे लाखों मुस्लिम बच्चों के अभिवावकों ने 'इस ईद नए कपड़े नहीं' और 'बचे पैसों को ज़रूरतमंदों को दान' का मन बना रखा है. रमज़ान और ईद को 'क़ानूनी दायरों में रहकर मनाने,' 'ज़िम्मेदार शहरी होने का फ़र्ज निभाने', सोशल डिस्टेंसिंग, तालाबंदी वग़ैरह के मद्देनज़र पवित्र माह में पढ़ी जानेवाली विशेष 'नमाज़ों को घर में ही अदा' करने, इफ़्तार की दावतों से बचने और वैश्विक महामारी के समय 'मानवता की सुरक्षा का दायित्व निभाने' जैसी बातें तक़रीबन महीने भर पहले तबसे ही होने लगीं थीं जब रमज़ान शुरू होने पर लोग एक दूसरे को बधाई संदेश भेज रहे थे. और 25 अप्रैल को रमज़ान के भारत में शुरू होने के दो-तीन दिनों के बाद से ही पर्सनल मैसेजिंग, वॉट्सऐप ग्रुप्स और सोशल मीडिया में चर्चा होने लगी कि इस बार ईद की ख़रीदारी न करके किसी भूखे परिवार के लिए भोजन का इंतजाम करें, किसी बच्चे की स्कूल फ़ीस भरें, किसी के घर का किराया अदा कर दें और 'रमज़ान का सही अर्थ में निर्वाह करें.

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