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कीमत से नहीं टैक्स से टूटती है कमर

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कीमत से नहीं टैक्स से टूटती है कमर

पेट्रोल और डीजल की कीमतें आसमान पर चली गई हैं। सोमवार को मुंबई में एक लीटर पेट्रोल 88 पर चला गया है। यही हाल डीजल का भी है। दिल्ली में डीजल 80.73 पैसे प्रति लीटर पर पहुंच गया है। जो पेट्रोल आज 88 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है, वह तेल कंपनियों को सभी खर्चे जोड़ने के बाद करीब 39.21 रुपये प्रति लीटर का पड़ता है। डीलर कमीशन जोड़ने के बाद यह कीमत 42.84 रुपये प्रति लीटर पहुंच जाती है। यही हाल डीजल का भी है। एक लीटर डीजल तैयार करने में तेल कंपनियों को 42.85 रुपये प्रति लीटर खर्च करने पड़ रहे हैं। डीलर कमीशन जोड़ने के बाद यह 45.36 प्रति लीटर पहुंच जाती है। दरअसल केंद्र सरकार वर्तमान में पेट्रोल पर 19.48 रुपये की एक्साइज ड्यूटी लगाती है और राज्य सरकार भी टैक्स वसूलती है। दिल्ली में एक लीटर के लिए 16.83 रुपये प्रति लीटर वैट चुकाना पड़ता है। केंद्र और राज्य सरकारों की तरफ से लगाए जाने वाले ये टैक्स सरकारों की कमाई का सबसे बड़ा जरिया हैं। लगातार ये मांग की जा रही है कि सरकार टैक्स में कटौती करे। हालांकि उसकी तरफ से एक रुपये की भी कटौती करने का मतलब है कि उसे हजारों करोड़ रुपये का राजस्व में नुकसान झेलना पड़ेगा। इंडियन ऑयल कंपनी के 3 सितम्बर के पेट्रोल बिल्ड अप प्राइस के मुताबिक जब उसने एक लीटर तैयार किया, तो उसे इस पर 39.21 रुपये खर्च करने पड़े. फिर डीलर ने 3.63 कमीशन जोड़ा। अब इस पर केंद्र ने 19.48 एक्साइज और दिल्ली सरकार ने 16.83 रुपये वैट लगाया। इस तरह 3 सितंबर को एक लीटर पेट्रोल दिल्ली में 79.15 पर पहुंच गया।किस तरह सरकार की तरफ से लगाया जाने वाला टैक्स जेब पर सबसे ज्यादा बोझ डालता है। ऐसे में सरकार के पाले में ही गेंद आ जाती है। अब देखना होगा कि सरकारें अपनी तरफ से वसूले जाने वाले टैक्स में कोई कटौती करती हैं या नहीं।

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