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क्या दाऊदी बोहरा महिलाओं की तकलीफ भी सुनेंगे मोदी जी

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क्या दाऊदी बोहरा महिलाओं की तकलीफ भी सुनेंगे मोदी जी

पीएम नरेंद्र मोदी ने मुसलमानों से जुड़ा तीन तलाक का मुद्दा सबसे तेजी से उठाया । एक बार में तीन तलाक को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी ने मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों का हनन करार दिया । सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में भी इस प्रथा को खत्म करने की वकालत की, जिसके बाद संवैधानिक पीठ के फैसले में एक साथ तीन तलाक को अवैध ठहरा दिया । इसके बाद मुस्लिम महिलाओं का खतना खत्म कराने के लिए भी पीएम मोदी से मांग की गई, लेकिन यह मसला कभी बीजेपी या पीएम मोदी के भाषणों का हिस्सा नहीं बना। हालांकि, यह मामला भी फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में है। शुक्रवार को पीएम नरेंद्र मोदी इंदौर में जिस दाऊदी बोहरा मुस्लिम समुदाय के बीच पहुंचे, उसी समाज में महिलाओं का खतना कराने की प्रथा है। ऐसा इसलिए ताकि महिलाओं में सेक्स की इच्छा खत्म हो जाये या कम हो जाये । हालांकि, संख्या के लिहाज से ये काफी कम है, लेकिन इसे एक बड़ी कुरीति के रूप में देखा जाता है। ऐसा इसलिए भी क्योंकि तीन तलाक की तरह ही दुनिया के कई मुल्क महिलाओं के खतना वाली प्रथा खत्म कर चुके हैं। यह मामला भी चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की बेंच में सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट कह चुका है कि महिलाओं का खतना संविधान के अनुच्छेद 21 और 15 का उल्लंघन है, जो हर नागरिक को जीवनरक्षा और निजी आजादी के साथ-साथ धर्म, जाति और लिंग के आधार पर भेदभाव नही करने की इजाजत देता है। कोर्ट में केंद्र सरकार का पक्ष रखते हुए अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल कह चुके हैं कि महिलाओं का खतना मौजूदा कानून के तहत अपराध है। अटॉर्नी जनरल ने बताया था कि खतना के लिए मौजूदा कानून में सात साल की सजा का प्रावधान है। साथ ही वो भी बता चुके हैं कि 42 देश इस प्रथा पर बैन लगा चुके हैं, जिनमें से 27 अफ्रीकी देश हैं। यहां तक कि विश्व स्वास्थ्य संगठन पर भी इस पर बैन की बात कह चुका है । मुस्लिम महिलाओं के साथ जिस प्रथा को सुप्रीम कोर्ट संविधान के खिलाफ बता चुका है, उसे बीजेपी या मोदी सरकार ने मुद्दा क्यों नहीं बनाया, इस पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सीनियर सदस्य कमाल फारूकी ने कहा कि बीजेपी या मोदी सरकार ने तीन तलाक को देशव्यापी मुद्दा बनाया, क्योंकि इनकी संख्या ज्यादा है । सरकासर मुसलमानों को बदनाम भी करना चाहती है । बोहरा मुस्लिमों की संख्या देश में काफी कम है, इसलिए बीजेपी ने इस मसले पर मुस्लिम महिलाओं के अधिकार का बीड़ा नहीं उठाया। बोहरा समुदाय से ताल्लुक रखने वाले मशहूर कारोबारी जफर सरेशवाला ने कहा कि देश और दुनिया में बोहरा समुदाय की संख्या काफी कम है और खतने का चलन चुनिंदा लोगों के बीच है। वहीं, उन्होंने ये भी कहा कि नरेंद्र मोदी का बोहरा समुदाय से बहुत पुराना नाता है और उनका मस्जिद जाना बीजेपी के लिए सबक है। दूसरी तरफ पीएम मोदी की मस्जिद जाने की ताजा तस्वीरों को राजनीतिक तौर पर भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसी साल मध्य प्रदेश में चुनाव होने हैं और राज्य में बोहरा मुसलमानों की आबादी ढाई लाख के करीब है। देश में 15 लाख से ज्यादा बोहरा समुदाय के लोग हैं। इनमें शिया भी हैं और सुन्नी भी । दाऊदी बोहरा शिया मुस्लिम होते हैं, जो सूफियों और मज़ारों पर खास विश्वास रखते हैं और 21 इमामों को मानते हैं, जबकि सुन्नी बोहरा हनफी इस्लामिक कानून को मानते हैं। मोदी कहते हैं कि बोहरा समाज के साथ उनका रिश्ता बहुत ही पुराना है। मैं जब मुख्यमंत्री था तब कदम-कदम पर बोहरा समाज ने मेरा साथ दिया। लेकिन बड़ा सवाल ये है कि मुसलमानों के जिस तबसे से पीएम मोदी के व्यक्तिगत तौर पर इतने नजदीकी रिश्ते हैं, वहां महिलाओं के साथ होने वाले ऐसे कृत्य पर उन्होंने प्रखरता से कभी अपनी राय का इजहार नहीं किया, जिसे सुप्रीम कोर्ट भी संविधान का उल्लंघन मानता है।

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