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एएच व्हीलर बुक स्टॉल की होगी विदाई

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एएच व्हीलर बुक स्टॉल की होगी विदाई

ट्रेन से यात्रा करते समय स्टेशन पर एएच व्हीलर के बुक स्टॉल जरूर नजर आते हैं लेकिन अब रेलवे इन बुक स्टॉल की विदाई की योजना बना रहा है। रेलवे बोर्ड ने AH Wheeler को हटाने के लिए पॉलिसी बनाई है। हालांकि एएच व्हीलर ने इसका विरोध किया है। रेलवे बोर्ड पूरे भारत में स्टेशन पर सभी स्टॉल को मल्टी पर्पस स्टॉल बनाना चाहता है। ये स्टॉल किताब, मैगजीन, न्यूज पेपर्स के साथ दवाई, पैकेज्ड पानी की बॉटल, चिप्स, बिस्किट और दूध का पाउडर जैसी चीजें बेचेंगे। अभी किताब के लिए अलग स्टोर है। वहीं खाने-पीने के सामान और कई जगह दवाई के भी स्टेशन पर अलग-अलग स्टोर हैं। इससे स्टेशन पर जगह खाली होगी और यात्रियों को सुविधा होगी। बोर्ड ने सेंट्रल रेलवे जोन को ये नीति लागू करने के लिए पत्र भेजा है। अभी ये पॉलिसी मुंबई में लागू करने की योजना बन रही है। एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इस नई पॉलिसी का उद्देश्य स्टेशन पर स्टॉल की संख्या घटाना है। इस मुद्दे पर सेंट्रल रेलवे के अधिकारियों ने बोर्ड से और सफाई की मांग भी की है। पॉलिसी लागू होने के बाद स्टॉल के मालिकों को उनके स्टॉल मल्टी पर्पस बनाने के लिए कहा जाएगा। इसका विरोध भी शुरू हो गया है। स्टॉल के मालिकों के मुताबिक इससे उनको घाटा होगा। सेंट्रल रेलवे के मुताबिक नए नियम के तहत एक कंपनी एक जोन में 10 से ज्यादा मल्टी पर्पज स्टॉल नहीं हो सकते। अभी सेंट्रल रेलवे में सबअर्बन नेटवर्क पर एएच व्हीलर के 18 स्टॉल हैं। अधिकारी के मुताबिक एएच व्हीलर के बचे हुए स्टॉल कॉन्ट्रैक्ट पूरा होने पर बंद हो जाएंगे। एएच व्हीलर के मालिकों ने इस मुद्दे पर रेलवे बोर्ड से संपर्क किया है। अभी व्हीलर अपने सालाना टर्नओवर का 5 फीसदी रेलवे को फीस के तौर पर देते हैं। नई गाइडलाइंस के मुताबिक उनको अपने टर्नओवर का 12 फीसदी देना होगा। एएच व्हीलर का पहला स्टॉल रेलवे स्टेशन पर इलाहाबाद में 1877 में खुला था। ये एक भारतीय कंपनी है। इसका नाम लंदन बुकस्टोर के मालिक ऑर्थर हेनरी व्हीलर्स के नाम पर पड़ा है।

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