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ताजिकिस्तान में जिंदगी शाइस्ता प्रोजेक्ट से घट गई घरेलू हिंसा

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ताजिकिस्तान में जिंदगी शाइस्ता प्रोजेक्ट से घट गई घरेलू हिंसा

र्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के आंकड़े बताते हैं कि दुनिया में हर तीन में से एक महिला उत्पीड़न का शिकार होती है। वहीं, घरेलू हिंसा के मामलों में ताजिकिस्तान की महिलाओं की स्थिति सबसे खराब है। यहां 2014 तक 64% महिलाओं से रोजाना मारपीट होती थी। ऐसे में यहां ‘जिंदगी शाइस्ता’ प्रोजेक्ट शुरू किया गया। इसकी वजह से घरेलू हिंसा की दर घटकर 34% रह गई। वहीं, 59% महिलाओं को घर से बाहर जाकर काम करने की आजादी भी मिल गई। ताजिकिस्तान के उत्तरी जिले पेंजीकेंत के गांव जोमी में रहने वाली रानो महमुरोदोवा (42) की जिंदगी में भी ‘जिंदगी शाइस्ता’ प्रोजेक्ट बदलाव लाया। 18 साल की उम्र में रानो का निकाह हुआ था। करीब 22 साल तक उन्होंने अपने पति के दुर्व्यवहार का सामना किया। नशे का आदी होने के बाद उनके पति ने नौकरी छोड़ दी थी और वे हर वक्त रानो के साथ गाली-गलौज और मारपीट करता था। जोमी गांव का सर्वे किया गया तो घरेलू हिंसा का आंकड़ा 60% पाया गया। रानो बताती हैं कि लगातार काउंसलिंग के बाद उनके पति के व्यवहार में सुधार आया और वे दोबारा नौकरी करने लगा। उसने रानो से कहा, ‘‘मुझे पता ही नहीं लगा कि मेरे साथ रहना कितना मुश्किल था। तुम्हें 22 साल तक दिए कष्ट के लिए मुझे माफ कर दो।’’ रोमी का कहना है कि जिंदगी शाइस्ता का मतलब गरिमा से जीना होता है। यह प्रोजेक्ट मेरे साथ-साथ देश की हजारों महिलाओं के जीवन में बदलाव ले आया।

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