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Exclusive: अयोध्या में फिर हलचल मुख्य खबरें
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Exclusive: अयोध्या में फिर हलचल
मौसम जब चुनाव का होता है तब उत्तर प्रदेश के अयोध्या में बहार आ जाती है। ऐसा ही कुछ हो रहा इस समय भी जबकि राम की नगरी में हलचल एकदम से बढ़ गयी है। चुनाव नज़दीक आते ही राम मंदिर निर्माण की मांग सब तरफ से उठने लगती है। वर्ष 1992 में विवादित ढांचा गिरने के बाद 26 साल होने को आये लेकिन मंदिर का मुद्दा आज भी उतनी ही शिद्दत के साथ ज़िंदा है। विश्व हिन्दू परिषद् के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष प्रवीण भाई तोगड़िया इस समय अयोध्या में हैं अपने लावलश्कर के साथ। इतने लोग पहुँच गए हैं वहां कि उनका खाने पीने की व्यवस्था के लिए बाहर से भोजन मंगाना पड़ा। सोमवार की रात फैज़ाबाद के जिला प्रशासन ने राशन ला रहे ट्रक सीमा पर रोक दिए जो जद्दोजहद के बाद ही प्रवेश कर सके। अब आलम यह है कि 25 नवम्बर को शिव सेना के नेता उधव ठाकरे ने अयोध्या पहुँचने का कार्क्रम घोषित किया है। फैज़ाबाद और अयोध्या में स्थानीय लोग बता रहे हैं कि वहां होटल और धर्मशालाएं अभी से बुक होना शुरू हो गयी हैं। ज़ाहिर है भीड़ एकत्र होने के इमकान हैं और तैयारी भी शुरू हो गयी है। अब यह तो चलेगा क्योंकि लोक सभा के चुनाव 2019 में हैं , उससे पहले इलाहाबाद ( प्रयागराज ) में संगम तट पर विश्व का सबसे बड़ा हिन्दू धार्मिक आयोजन कुम्भ मेला है। मतलब यह है कि यत्र , तत्र और सर्वत्र राम मंदिर की ही बात होगी और मुद्दा ठण्ड के मौसम में भी गर्मी पकड़ता रहेगा। इस बीच विश्व हिन्दू परिषद् , राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और अन्य हिन्दू संघटन इस मुद्दे को हवा देते रहेंगे और चुनाव नज़दीक आते आते , राम मंदिर फिर फोकस में होगा। अब यह कहना कठिन है कि चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को इससे लाभ होगा या नुक्सान लेकिन एक बात तय है कि अयोध्या में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा , स्थानीय लोगों के लिए रोज़गार में तेजी आ जाएगी और शहर गहमागहमी से भरपूर हो जायेगा। अब यह बहस बेमानी होगी कि इससे आम जनता को क्या फायदा होगा , चुनाव के मौसम में इस तरह की बातों का कोई अर्थ तो होता नहीं है और न ही करना चाहिए। बस तमाशा देखिये और देखते रहिये क्योंकि चुनाव का मौसम है।
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