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क्या है अयोध्या का TITLE SUIT ?मुख्य खबरें
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क्या है अयोध्या का TITLE SUIT ?
सुप्रीम कोर्ट में सोमवार 29 अक्टूबर से संभवतः देश के सबसे बड़े मसले पर सुनवाई होने जा रही है। यहाँ यह स्पष्ट होना ज़रूरी है कि सुनवाई सिर्फ अयोध्या की विवादित भूमि पर मालिकाना हक यानि TITLE SUIT को लेकर है। राम जन्मभूमि से जुड़ा जमीन का मामला बेहद पेचीदा रहा है जो 1950 में गोपाल सिंह विशारद द्वारा इलाहाबाद हाई कोर्ट में दायर याचिका से शुरू हुआ था। इस याचिका में विवादित स्थल पर हिंदू रीति रिवाज से पूजा की इजाजत देने की मांग की गए थी। 1959 में निर्मोही अखाड़ा ने विवादित भूमि पर नियंत्रण की मांग की। बाद में निर्मोही अखाड़ा की तर्ज पर ही मुस्लिम सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने भी विवादित भूमि पर अपने मालिकाना हक़ का दावा ठोक दिया था। लम्बी कानूनी जद्दोजहद के बाद वर्ष 2010 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने विवादित भूमि को तीन हिस्सों में बांटने का आदेश दिया था। इस फैसले के तहत हाई कोर्ट ने विवादित भूमि के तीन हिस्से रामलला विराजमान, निर्मोही अखाड़ा और सुन्नी वक्फ बोर्ड को सौंपने का आदेश दिया गया था। इलाहाबाद हाई कोर्ट के इस फैसले पर कोई भी पक्ष राजी नहीं हुआ और सुप्रीम कोर्ट में इसे चुनौती दी गई जिसके बाद 9 मई 2011 को सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी थी जो आज भी चल रही है। सुप्रीम कोर्ट ने भी यह स्पष्ट कर दिया था कि यह सुनवाई सिर्फ जमीन विवाद को लेकर की जाएगी और अयोध्या से जुड़े किसी और मामले से इसका कोई सम्बन्ध नहीं है।
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