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इस गांव में नहीं होती दिवाली

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इस गांव में नहीं होती दिवाली

रोशनी का पर्व दिवाली देश भर में 7 नवंबर को मनाया जाएगा लेकिन हिमाचल प्रदेश का एक ऐसा गांव है जहां इस दिन न तो कोई स्पेशल लाइटिंग होती है और न कोई धूम धड़ाका होता है । ये है हमीरपुर जिले के सम्मू गांव जो जिला मुख्यालय से करीब 25 किमी दूर है। ऐसा सदियों से होता चला आ रहा है। यहां कई साल से दीवाली मनाना तो दूर की बात, इस दिन घर पर पकवान तक नहीं बनाए जाते है। लोगों का मानना है कि गांव को श्राप है, इसलिए यहां दीवाली के दिन कोई रौनक देखने को नहीं मिलती है। अगर कोई इसे नजरअंदाज करता है तो गांव पर आपदा और अकाल मृत्यु का खतरा मंडराने लगता है। दीपावली न मनाने के पीछे यहां के लोग एक कहानी सुनाते है। कहानी के अनुसार दिवाली के ही दिन गांव की ही एक महिला अपने पति के साथ सती हो गई थी। महिला दीपावली मनाने के लिए मायके जाने को निकली थी। उसके पति राजा के दरबार में सैनिक था। लेकिन जैसे ही महिला गांव से कुछ दूर पहुंची तो उसे पता चला कि उसके पति की मौत हो गई है। पति के शव को ग्रामीण ला रहे थे। महिला गर्भवती थी। महिला को यह सदमा बर्दाश्त नहीं हुआ और वह अपने पति के साथ ही सती हो गई। साथ ही जाते-जाते वह सारे गांव को यह श्राप दे गई कि इस गांव के लोग कभी दीपावली का त्यौहार नहीं मना पाएगे। उस दिन से लेकर आज तक इस गांव में दीवाली नहीं मनाई है। लोग इस दिन केवल सती की मूर्ति की पूजा करते है।

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