content-cover-image

विशेष रिपोर्ट: कांग्रेस के दिल को लग गयी

मुख्य खबरें

00:00

ट्रेंडिंग रेडियो

विशेष रिपोर्ट: कांग्रेस के दिल को लग गयी

बात कुछ दिल को लग गयी - कांग्रेस पार्टी को। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और बहुजन समाज पार्टी के सुप्रीमो मायावती ने कांग्रेस को भारतीय जनता पार्टी के समकक्ष क्या रखा , इससे न केवल लोक सभा चुनाव के पहले महागठबंधन की संभावनाओं को झटका लगा बल्कि बेवजह आलोचना के कारण कांग्रेस को भी बात चुभ कर रह गयी। इसका नतीजा यह होने जा रहा है कि कांग्रेस ने अपनी हैसियत बताने और जताने की नीयत से एक ज़ोरदार योजना बनाई है। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार पार्टी ने अगले महीने पार्टी अध्यक्ष राहुल गाँधी का उत्तर प्रदेश का दौरा नियोजित करने का फैसला लिया है। कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों ने बताया इस योजना का उद्देश्य जनसँख्या और लोक सभा में सीटों की संख्या के मामले में देश के सबसे bade प्रदेश की जनता को कांग्रेस की उपयोगिता और क्षमताओं के बारे में बताना और भारतीय जनता पार्टी के अतिरिक्त विपक्षी दलों को भी अपनी ताकत का अहसास कराना है। हुआ यूं कि पिछले कुछ दिनों में मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में विधान सभा चुनाव के प्रचार के दौरान अखिलेश और मायावती ने कांग्रेस ke liye कुछ विपरीत टिप्पणियां कीं जो निश्चित ही कांग्रेस को अच्छी नहीं लगीं इन टिप्पणियों का तात्पर्य यही था कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस इस कदर कमज़ोर है कि महागठबंधन में साथ रखने का कोई बड़ा फायदा नहीं होने वाला। कांग्रेस के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने नाम न बोलने की शर्त पर बताया कि उनकी पार्टी चाहती तो है, भाजपा को हराने के लिए विपक्षी दल एक हो कर चुनाव लड़ें लेकिन जिस तरह कांग्रेस के बारे में अप्रिय बयान दिए जा रहे हैं वह पार्टी की लीडरशिप को तनिक भी नहीं भा रहे हैं। इसी लिए पार्टी ने कांग्रेस को भाजपा का विकल्प बताने और यह तथ्य स्थापित करने के लिए वृहद योजना बनाई है। फिलहाल तय किया गया है कि दिसंबर माह के अंत में राहुल गाँधी उत्तर प्रदेश के सभी पांच जोन में एक -एक रैली सम्बोधित करेंगे जिसमे लखनऊ भी शामिल है। यही नहीं ,वह इस दौरान चौपाल , नुक्कड़ मीटिंग और जनसम्पर्क करके लोगों को कांग्रेस के प्रासंगिकता और नीतियों के बारे में बताएँगे। इससे आगे यहाँ तक सोचा जा रहा है कि पार्टी को इस तरह प्रोजेक्ट किया जाई जैसे ki वह अकेले apne दम पर भाजपा को हराने में सक्षम है। देखना है कि कांग्रेस की यह योजना कहाँ तक सफल होती है क्योंकि उत्तर प्रदेश में भाजपा की कमज़ोर हालत किसी से छुपी नहीं है और उस पर संगठन की कमी भी है। वर्ष 2017 के विधान सभा चुनाव में कांग्रेस ने प्रदेश की 105 सीटों पर सपा के साथ समझौते के आधार पर चुनाव लड़ा था और केवल सात सीटों पर विजय हासिल की थी। लोक सभा में तो उत्तर प्रदेश से उसकी सिर्फ दो ही सीटें हैं ,रायबरेली से सोनिआ गाँधी और अमेठी से राहुल गाँधी। अब 2019 के लोक सभा चुनाव में क्या होता है , देखने की बात है।

Show more
content-cover-image
विशेष रिपोर्ट: कांग्रेस के दिल को लग गयी मुख्य खबरें