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राम मंदिर : मोदी आरएसएस की जुगलबंदी

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राम मंदिर : मोदी आरएसएस की जुगलबंदी

अयोध्या में रविवार 25 नवम्बर को हुई धर्मसभा में किसी अनहोनी की आशंका बड़ी आसानी से खत्म हो गई । विपक्ष की कुछ गड़बड़ होने की सभी आशंका निर्मूल साबित हुई । राम मंदिर जल्द बनाने के लिए हुई धर्मसभा का संदेश पूरे देश में पहुंच गया । विश्व हिंदु परिषद और आरएसएस अपने इस मकसद में कामयाब होती दिखाई दी । शिवसेना ने भी राम मंदिर निर्माण को लेकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई । शिवसेना पमुख उद्व ठाकरे पहली बार पूरे परिवार के साथ अयोध्या आए और दो दिन रूके । धर्मसभा में ये भी उभर के आया कि सरकार मंदिर के लिए शीतकालीन सत्र में बिल लायेगी और बिल में अड़ंगा लगा तो सत्र के बाद अध्यादेश आयेगा । सम्मानित संत चित्रकूट के महंत राम भद्राचार्य ने कहा..केंद्र सरकार में सबसे बड़े मंत्री ने मुझे वचन दिया है कि कि 11 दिसम्बर के बाद 12 जनवरी तक इस मामले में बहुत कुछ होगा । पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव की आचार संहिता 11 दिसम्बर को परिणाम आने के बाद खत्म हो जाएगी ।सरकार में सबसे वरिष्ठ मंत्री तो राजनाथ सिंह ही हैं क्योंकि पीएम के विदेश दौरे पर इस पद का अतिरिक्त कार्य भार उन पर ही होता है । इससे पहले साधु संत और आरएसएस पूरे देश में माहौल बनाने का काम करेगी । संसद सत्र शुरू होने के तीन दिन पहले साधु संत मंदिर के लिए दिल्ली में रैली करेंगे ताकि सरकार पर इसे लेकर बन रहा दवाब कम नहीं हो । अब जरा टाइमिंग देखिए । पीएम नरेंद्र मोदी पिछले कुछ दिन से पांच राज्यों के हो रहे विधानसभा चुनाव में ताबड़तोड़ रैलियां कर रहे हैं । अभी तक उन्होंने मंदिर को लेकर कोई बात नहीं की और न अपने पूरे कार्यकाल में कभी इस मुद्दे को छुआ । उन्होंने कल जनसभा में कहा कांग्रेस नहीं चाहती कि अयोध्या में राम मंदिर बने । उनके नेता जो इस मामले में मुस्लिम पक्षकार के वकील भी हैं वो कहते हैं कि इसकी सुनवाई 2019 लोकसभा चुनाव के बाद होनी चाहिए । चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा जब इसकी रोजाना सुनवाई के लिए तैयार हो गए थे तो कांग्रेस उन पर महाभियोग लाने की धमकी देने लगी। कांग्रेस नेता और वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि वो किसी भी सुनवाई के लिए चीफ जस्टिस की अदालत में नहीं जायेंगे । आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने भी रविवार को कहा कि एक साल पहले मैं खुद कहता था कि मंदिर के मामले में धैर्य रखो लेकिन अब कह रहा हूं कि धैर्य की सीमा अब खत्म हो गई है । मंदिर के लिए सरकार कानून बनाये । कानून कैसे बनाना है ये देखना सरकार का काम है । राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि मंदिर को लेकर आरएसएस और केंद्र सरकार की पूरी योजना तैयार है। बस टाइमिंग का सवाल है । चुनाव के ठीक पहले सरकार अध्यादेश ला कर मंदिर निर्माण शुरू करा देगी ताकि सरकार से हुई नाराजगी दूर हो जाय और हिंदू वोट एकमुश्त पार्टी को मिले । सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अयोध्या के जमीन के मालिकाना हक के मामले में वो जनवरी के पहले सप्ताह में फैसला करेगी कि इसे किस पीठ को सौंपना है और सुनवाई कब शुरू करनी है । बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह भी कहते हैं कि पार्टी जनवरी के पहले सप्ताह में सुप्रीम कोर्ट का रूख देखेगी । हालांकि मंदिर निर्माण को लेकर साधु संतों के आन्दोलन का असर विधानसभा चुनाव में भी दिखने लगा है । राजस्थान में अब हिंदू वोट और मंदिर की चर्चा होने लगी है ।

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