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HUMOUR : ग़ालिब और Whatsapp University

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HUMOUR : ग़ालिब और Whatsapp University

भाषा चाहे हिंदी हो अथवा उर्दू , असीमित है और उसका विस्तार मानवीय ज्ञान से परे है। भाषा का मज़ाक निदंनीय है , ऐसा हमारा मानना है लेकिन जब मामला WHATSAPP यूनिवर्सिटी से लिकलता है तो हम हँसे बगैर नहीं रह सकते हैं। ऐसे ही सोशल मीडिया पर आजकल एक सन्देश चल रहा है जो हम आप के साथ शेयर कर रहे हैं मशहूर शायर मरहूम मिर्ज़ा ग़ालिब के रूह से क्षमा याचना के साथ। WHATSAPP मैसेज क्या कह रहा है , ज़रा मुलाहिज़ा फरमाएं - कहते हैं - मिर्ज़ा ग़ालिब का असली नाम गुलाब सिंह था जो अब अपने असली नाम से जाने जाएंगे और इसके लिए एक अध्यादेश लाया जा रहा है। मज़ाक तो अब शुरू होता है जिसमे कहा गया है कि ग़ालिब साहब के जो बेहद लोकप्रिय शेर हैं असल में वह हिंदी में हैं और कुछ इस तरह हैं। ग़ालिब के मशहूर ग़ज़ल का शेर था बाज़ीचा-ए-अतफ़ाल है दुनिया मेरे आगे होता है शब-ओ-रोज़ तमाशा मेरे आगे असल में हिंदी में यह कुछ यूं है---- शिशु क्रीड़ा क्षेत्र है विश्व मेरे समक्ष होता है अहर्निश स्वांग मेरे समक्ष!! इसी तरह हर एक बात पे कहते हो तुम कि तू क्या है तुम्हीं कहो कि ये अंदाज़-ए-गुफ़्तुगू क्या है यह भी असल में ऐसे बताया गया है कि ---प्रत्येक विषय पर महोदय कहते हैं कि तू क्या है आप विश्लेशित करें ये वार्तालाप शैली क्या है अब गौर करें इस शेर पर मत पूछ कि क्या हाल है मेरा तेरे पीछे तू देख कि क्या रंग है तेरा मेरे आगे व्हाट्सप्प यूनिवर्सिटी के एक मेधावी ने इसे बनाया कुछ इस तरह --न पूछो अवस्था मेरी तुम्हारी अनुपस्थिति में बस अपने व्यवहार को देखो मेरे सम़क्ष एक और हैं और भी दुनिया में सुख़न-वर बहुत अच्छे कहते हैं कि 'ग़ालिब' का है अंदाज़-ए-बयाँ और इसका तर्ज़ुमा देखिये--है अन्य भी जगत में काव्यकार उत्तमोत्तम तथापि कहते हैं सर्वजन गुलाबसिंह की काव्य शैली है अन्यतम एक और शेर इसी ग़ज़ल का रगों में दौड़ते फिरने के हम नहीं क़ाइल जब आँख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है जिसका क्या हाल किया गया वह भी सुनिए --शिराओं में आवागमन हेतु हम नहीं अभीभूत जब नेत्र से ही न टपके तो फिर रूधिर क्या है सुन कर मज़ा आया न लेकिन हम आपको बता दें कि हमारा उद्देश्य न तो भाषा का मज़ाक उड़ाना है , न ही किसी व्यक्ति विशेष का बल्कि विशुद्ध मनोरजन की दृष्टि से हमने यह पेशकश की है। खबरि चाहता है कि आप के चेहरे पर सदैव मुस्कान रहे।

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