content-cover-image
8 की डोर से ऐसे बंधे हैं धर्मेंद्र और शर्मिला टैगोर,

मुख्य खबरें

00:00

ट्रेंडिंग रेडियो

8 की डोर से ऐसे बंधे हैं धर्मेंद्र और शर्मिला टैगोर,

8 दिसंबर को हिंदी सिनेमा के वेटरन एक्टर धर्मेंद्र अपना 83वां जन्म दिन मना रहे हैं। इसी दिन शर्मिला टैगोर का भी बर्थडे होता है। इन दोनों सितारों के बीच 8 का एक ऐसा ग़ज़ब संयोग है,जन्म से शुरू हुआ ये संयोग बड़े पर्दे पर भी नज़र आता है, ख़ासकर उन फ़िल्मों में, जिनमें धर्मेंद्र और शर्मिला ने साथ काम किया। इन फ़िल्मों की संख्या भी इत्तेफ़ाक़ से 8 ही है। इनमें से कुछ तो हिंदी सिनेमा की क्लासिक्स मानी जाती हैं। धर्मेंद्र और शर्मिला की सबसे यादगार फ़िल्म 1969 में आई 'सत्यकाम' है, जिसमें शर्मिला धर्मेंद्र की पत्नी के रोल में थीं। धर्मेंद्र को सामान्य तौर पर ही-मैन के रूप में देखा जाता है, जो अपनी बाजुओं के दम से बड़े-बड़े कारनामे कर गुज़रता है, मगर 'सत्यकाम' जैसी फ़िल्मों में धर्मेंद्र की इमोशनल साइड देखने को मिलती है। साठ के दशक में धर्मेंद्र और शर्मिला ने कई यादगार फ़िल्में की हैं। दोनों ने पहली बार 1966 की फ़िल्म 'अनुपमा' में साथ काम किया था। ये फ़िल्म भी हिंदी सिनेमा की क्लासिक्स में शामिल हैं1966 में ही आयी 'देवर' में धर्मेंद्र और शर्मिला ने साथ काम किया। देवर बंगाली उपन्यासकार तारा शंकर बंधोपाध्याय के नॉवल 'ना' पर आधारित फ़िल्म थी। इस सोशल ड्रामा में धर्मेंद्र और शर्मिला की अदाकारी ने कहानी को एक अलग ही रंग दिया।इसके अलावा मेरे हमदम मेरे दोस्त' (1968) और जासूसी फ़िल्म 'यक़ीन' (1969) पूरी तरह मसाला फ़िल्में थीं। क्रिटिक्स ने इन फ़िल्मों को भले ही सपोर्ट ना किया हो, मगर दर्शकों ने ख़ूब प्यार दिया। ऋषिकेश मुखर्जी की 'चुपके-चुपके' (1975) में धर्मेंद्र और शर्मिला की एक अलग ही साइड देखने को मिली। संजीदा और विशुद्ध मसाला अदाकारी के बाद इस फ़िल्म में धर्मेंद्र और शर्मिला ने कॉमेडी का रंग दिखाया।

Show more
content-cover-image
8 की डोर से ऐसे बंधे हैं धर्मेंद्र और शर्मिला टैगोर, मुख्य खबरें