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'हार' शब्द युवी की डिक्शनरी में नहीं!

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'हार' शब्द युवी की डिक्शनरी में नहीं!

क्रिकेटर युवराज सिंह आज अपना 37वां बर्थडे मना रहे है। चंडीगढ़ में पैदा हुए सिक्सर किंग युवराज सिंह की जिंदगी क्रिकेट के मैदान से लेकर घर तक बड़े संघर्षपूर्ण रही है लेकिन बावजुद इतने संघर्ष के युवी ने हार को कभी अपने इर्द गिर्द नहीं फटकने दिया। युवराज सिंह का नाम दिमाग में आते ही सबसे पहले 2007 के टी ट्वेंटी वर्ल्ड कप और 2011 के वनडे विश्व कप की यादें ताज़ा हो जाती हैं। युवराज ने अपनी बेहतरीन बल्लेबाजी से शानदार छवि के कारण आज करोड़ो दिलो पर राज करते है। युवराज सिंह को विश्व कप 2011 में अहम भूमिका निभाने में मैन ऑफ़ द टूर्नामेंट चुना गया। युवराज ने 3 अक्तूबर 2000 को अपने क्रिकेट जीवन का पहला मैच इंडियन क्रिकेट टीम में खेला, उसके बाद युवराज सिंह ने पीछे मुढ़कर नहीं देखा और लगातार इंडियन क्रिकेट टीम के लिए बढ़िया प्रदर्शन करने लगे। ये बात साल 2011 वर्ल्ड कप के दौरान की है जब उन्हें पता चला कि उनको कैंसर है। 2011 के वर्ल्ड कप के दौरान उनकी तबियत काफी ज्यादा बिगड़ गई थी। एक इंटरव्यू में युवराज ने बताया कि एक सुबह जब वह सोकर उठे तो बुरी तरह खांसने लगे थे। उनकी खांसी में लाल रंग का म्यूकस निकला, वही 14 सेंटीमीटर का ट्यूमर था। उन्होंने आगे बताया कि, जब मैं डॉक्टर से मिला तो उन्होंने मुझे कहा कि मैंने अभी इलाज नहीं करवाया तो मेरी जान भी जा सकती है। मेरी सेहत लगातार खराब होती जा रही थी, खेल भी खराब होता जा रहा था। इसके बाद करीब 2 महीने तक कैंसर से लड़ते रहे और फिर से मैदान पर वापसी की।

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