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विश्लेषण : आखिर योगी क्यों हैं निशाने पर

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विश्लेषण : आखिर योगी क्यों हैं निशाने पर

मध्य प्रदेश , राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी की हार की जिम्मेदारी तो वहां के मुख्यमंत्रियों ने ले ली लेकिन आश्चर्यजनक रूप से निशाने पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हैं। कहते हैं न कि जीत के साथ सब होते हैं लेकिन पराजित के साथ कोई नहीं। पांच राज्यों में विधान सभा चुनाव के प्रचार में योगी स्टार प्रचारक थे और पार्टी संघटन को सभी प्रत्याशियों ने मांग भेजी थी कि उनके क्षेत्र में योगी चुनाव प्रचार करें। उन्होंने किया भी और सत्तर से अधिक चुनाव सभाएं कीं। लेकिन अब स्थिति इसके उलट है , इन प्रदेशों में भाजपा के ही समर्थकों का कहना है कि योगी का फायर ब्रांड हिंदुत्व और विशेषकर भगवान् हनुमान पर दलित होने की टिप्पणी पार्टी के लिए विपरीत साबित हुई। अब इसमें तथ्य हो या न हो लेकिन हारने पर तमाम तर्क दिए जाते हैं। हालत यह हो गयी कि योगी को उत्तर प्रदेश में सफाई देनी पड़ी कि उन्होंने हनुमान को कभी दलित नहीं कहा था। बहरहाल सोशल मीडिया भी इसी रंग नज़र आया और योगी के इस बयान पर तरह तरह के मज़ाक किये गए। इसमें सच्चाई हो अथवा नहीं हो लेकिन एक बात स्पष्ट है कि भाजपा को मुखर हिंदुत्व की रणनीति के बारे में नए सिरे से सोचना पड़ेगा। लोक सभा के 2019 चुनाव नज़दीक हैं , ऐसा लग रहा है कि आम जनता मंदिर , गाय और ऐसे मुद्दों से बहुत प्रसन्न नहीं है और अब बात रोज़गार की , किसानों की और अर्थव्यवस्था की होगी। ऐसे में योगी ब्रांड राजनीति कितनी कारगर होगी , यह भाजपा के लिए विचारणीय होगा। उत्तर प्रदेश में गवर्नेंस को लेकर बहुत अच्छा सन्देश तो है नहीं , और इसके बावजूद अगर सिर्फ हिंदुत्व की बात की जाये तो कट्टर समर्थक तो खुश होंगे लेकिन आम आदमी इससे प्रभावित हो सकेगा , इसमें शक है। अभी भी लोक सभा चुनाव में कुछ समय बाकी है , देखते हैं हार के बाद केसरिया पार्टी के रणनीतिकार क्या नया तोड़ निकलते हैं।

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