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एशियाई देशों में सशस्त्र ड्रोन लेने-बनाने की होड़!मुख्य खबरें
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एशियाई देशों में सशस्त्र ड्रोन लेने-बनाने की होड़!
चीन ने पिछले दो साल में मध्य-पूर्व एशियाई देशों में हथियारों से लैस ड्रोन में होड़ पैदा कर दी है। दुनिया में हथियारों से लैस ड्रोन में मुख्यतया अमेरिका, चीन और इसराइल का नाम है। अमेरिका हथियार युक्त ड्रोन की बिक्री अभी तक नाटो देशों को करता आया है। इससे यूरोप में क़रीब-क़रीब सभी देशों में हथियार युक्त ड्रोन हैं। रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज़ इंस्टिट्यूट की एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने जॉर्डन, इराक़, सऊदी अरब और यूनाइटेड अरब अमीरात (यूएई) को सस्ते और टिकाऊ ड्रोन की बिक्री की हैं, तो इज़राइल, ईरान और टर्की ख़ुद अपने देश में ड्रोन बनाने लगे हैं। चीन ने मध्य पूर्व एशियाई देशों को बढ़िया सशस्त्र ड्रोन दिए हैं, जो वे अमेरिका से नहीं ख़रीद पा रहे थे। चीनी ड्रोन की बिक्री की ख़ासियत यह है कि इनके ड्रोन अमेरिकी नियमों से हटकर सस्ती दरों पर बेचे जा रहे हैं। इसका असर यह पड़ा है कि मध्य-पूर्व के देशों ने अमेरिका से सशस्त्र ड्रोन ख़रीदना ही बंद कर दिया है। अभी तक मध्य पूर्व के देश अमेरिकी ड्रोन ख़रीदने के क़ायल रहते थे, जो अमेरिकी सुरक्षा हितों के नज़रिए से बड़े महत्वपूर्ण थे। बताया जाता है कि यमन युद्ध में संयुक्त अरब अमीरात और ईरान ने ड्रोन का इस्तेमाल किया था।
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